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बरेली से हल्द्वानी तक बनेगा ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे’, 1 घंटे में पहुंचे पहाड़ों के द्वार, मुरादाबाद से भी कनेक्टविटी

Bareilly Haldwani Expressway : यूपी और उत्तराखंड के बीच सफर अब होगा सुपरफास्ट! NHAI बरेली से हल्द्वानी के बीच 100 किमी लंबा 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' बनाने जा रहा है। जाम से मुक्ति और समय की बचत के साथ पर्यटन को लगेंगे पंख। जानें क्या है NHAI का पूरा मास्टर प्लान।
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May 07, 2026
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बरेली से हल्द्वानी तक बनेगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे, PC- AI

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच की दूरियां अब सिमटने वाली हैं। अगर आप भी नैनीताल की वादियों में जाने के लिए बरेली के ट्रैफिक और जाम से जूझते थे, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बरेली से हल्द्वानी के बीच एक हाई-टेक 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। लगभग 100 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल सफर को आसान बनाएगा, बल्कि दोनों राज्यों के व्यापारिक रिश्तों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

जाम को 'बाय-बाय', रफ्तार को 'वेलकम'

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'ग्रीनफील्ड' होना है। अक्सर सड़कों को चौड़ा करने के लिए पुराने रास्तों का ही सहारा लिया जाता है, लेकिन यह एक्सप्रेसवे बिल्कुल नए रूट पर बनेगा। यह घनी आबादी वाले शहरों और कस्बों को पूरी तरह बाईपास करेगा, जिससे मुसाफिरों को तंग गलियों और चौराहों के जाम से मुक्ति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद 100 किलोमीटर का सफर तय करने में 90 मिनट (डेढ़ घंटे) तक की बचत होगी।

दिल्ली से नैनीताल जाना होगा बेहद आसान

NHAI की योजना के अनुसार, इस नए एक्सप्रेसवे को बरेली-मुरादाबाद हाईवे से लिंक किया जाएगा। इस स्ट्रैटेजिक कनेक्टिविटी का सीधा फायदा दिल्ली और पश्चिमी यूपी से आने वाले पर्यटकों को मिलेगा। अब वाहन चालक बिना बरेली शहर के ट्रैफिक में फंसे सीधे इस एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे। यह इंटरलिंकिंग कुमाऊं के पर्यटन के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित होने वाली है।

व्यापार और पर्यटन का नया 'हब'

हल्द्वानी को 'कुमाऊं का प्रवेश द्वार' कहा जाता है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से नैनीताल, भीमताल, रानीखेत और अल्मोड़ा जैसे हिल स्टेशनों तक पहुंचना अब बच्चों का खेल होगा। पर्यटन के साथ-साथ बरेली के प्रसिद्ध लकड़ी उद्योग और जरी-जरदोजी के सामान को पहाड़ों तक पहुंचाना भी सस्ता और सुलभ हो जाएगा।

क्या है ताजा स्टेटस?

परियोजना के लिए सीमांकन (Demarcation) का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। रूट लगभग फाइनल हो चुका है और जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसे एक 'कंट्रोल्ड-एक्सेस' एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसमें एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) और यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स भी होंगे।

Updated on:
07 May 2026 02:58 pm
Published on:
07 May 2026 02:58 pm