डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम भूमि एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे फूड कोर्ट को लेकर अब भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और स्ट्रीट वेंडरों के अधिकार कुचलने के आरोप तेज हो गए हैं।
बरेली। डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम भूमि एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे फूड कोर्ट को लेकर अब भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और स्ट्रीट वेंडरों के अधिकार कुचलने के आरोप तेज हो गए हैं। रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल ने पूरे मामले में ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विजिलेंस, ईओडब्ल्यू या किसी स्वतंत्र एजेंसी से हाईलेवल जांच कराने की मांग उठाई है।
व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी समेत कई उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का दावा है कि अगर निष्पक्ष जांच कराई गई तो करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हो सकता है।
डीडीपुरम में कुष्ठ आश्रम की जमीन से सटी भूमि पर बनाए जा रहे फूड कोर्ट को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब व्यापार मंडल ने आरोप लगाया है कि पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता नहीं बरती गई। संगठन का कहना है कि एक निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए बेहद कम दरों पर टेंडर दिया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार मेहरोत्रा ने कहा कि वर्षों से यहां छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर अपना रोजगार चला रहे थे, लेकिन बिना स्पष्ट नीति और पुनर्वास योजना के उन्हें हटाने की कार्रवाई कर दी गई। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों की खुली अनदेखी की गई। वेंडरों का न सर्वे कराया गया और न ही उन्हें कोई वैकल्पिक व्यवस्था दी गई। संगठन का कहना है कि नगर निगम और प्रशासन को यह जानकारी थी कि वर्षों से यहां छोटे कारोबारी अपनी दुकानें चला रहे हैं। इसके बावजूद बड़े ब्रांड और कंपनियों को जगह देने के लिए गरीब वेंडरों को हटाया गया। व्यापार मंडल ने इसे “रोजगार पर बुलडोजर” करार दिया है।
व्यापार मंडल की शिकायत में कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि भूमि के उपयोग और आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई। करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी की आशंका है। प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित पक्षों की मिलीभगत से पूरे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया। संगठन का दावा है कि यदि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है। विकास कार्य तेजी से कराया जा रहा है और जल्द ही फूड कोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा।