बाड़मेर

संघर्ष की कहानी: मां की मेहनत ने बेटे को वर्दी पहनाई: खुद भूखी रहीं, घर-घर झाड़ू-पोछा किया, हाथों में छाले, फिर भी सपना जिंदा रखा

बालोतरा जिले में गांव किटनोद के संतोष कुमार का सीआरपीएफ में चयन हुआ है। पिता के निधन के बाद मां सज्जनी देवी ने मजदूरी कर बेटे की पढ़ाई जारी रखी। ‘बहादुर मां’ के त्याग और संकल्प ने संतोष को देश सेवा की वर्दी तक पहुंचाया।
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Jan 18, 2026
Balotra Santosh Kumar from Kitnod Village Selected in CRPF
मां सज्जनी देवी के साथ संतोष कुमार (फोटो- पत्रिका)

बालोतरा: रेगिस्तान की धूल, तपती धूप और अभावों के बीच पले-बढ़े एक बेटे को मां की मेहनत ने देश सेवा की वर्दी तक पहुंचा दिया। बालोतरा जिले के छोटे से गांव किटनोद की यह कहानी मां के त्याग और बेटे के संकल्प की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है।

गांव के एक साधारण परिवार के मुखिया स्वर्गीय भैराराम भील ने अपने बेटे संतोष कुमार के लिए बड़े सपने देखे थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा फौज में जाकर देश की सेवा करे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। संतोष के बचपन में ही पिता का देहांत हो गया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

बहादुर मां के नाम से बनाई पहचान

पति के असमय निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी संतोष की मां सज्जनी देवी के कंधों पर आ गई। न कोई संपत्ति थी, न स्थायी सहारा, लेकिन कठिन हालात में भी हार नहीं मानी। गांव में ‘बहादुर मां’ के नाम से अपनी पहचानी बनाई। उन्होंने अपने पति का सपना पूरा करने के लिए संकल्प लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, लेकिन बेटे की पढ़ाई और सपनों से समझौता नहीं करेंगी।

उन्हें अटूट विश्वास था कि मेरा संतोष फौजी बनेगा और देश की सेवा करेगा। बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। कभी खेतों में, कभी निर्माण स्थलों पर, तो कभी घर-घर जाकर झाड़ू-पोंछा। हाथों में छाले, पीठ दर्द से झुकी, लेकिन आंखों में बेटे के सपने हमेशा चमकते रहे। कई बार खुद भूखी रहीं, मगर संतोष की किताबें और स्कूल जाना कभी नहीं रुका। वहीं, विषम परिस्थितियों में भी मां का प्यार और मेहनत कभी डगमगाई नहीं।

मां के आशीर्वाद को बनाया संबल

संतोष ने मां सज्जनी देवी के इस त्याग को करीब से देखा और महसूस किया। स्कूल के दिनों से ही अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाया। फौज में भर्ती होने को लेकर एसएससी जीडी सीआरपीएफ परीक्षा के लिए उसने कड़ी मेहनत की और शारीरिक प्रशिक्षण भी लिया।

संतोष ने मां के आशीर्वाद को अपना सबसे बड़ा संबल बनाया। आखिरकार परीक्षा परिणाम में संतोष कुमार का सीआरपीएफ में चयन हो गया। जैसे ही यह खबर गांव किटनोद पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, मां की आंखों में इस बार खुशी के आंसू थे।

संतोष ने कहा कि यह सफलता मेरी मां की मेहनत और त्याग का परिणाम है। उनके आशीर्वाद से मुझे देश सेवा का अवसर मिला। सज्जनी देवी ने कहा कि बुलंद हौसलों से की गई सच्ची मेहनत हर बाधा को पार कर सकती है।

Published on:
18 Jan 2026 05:28 am
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