
बाड़मेर. बेटियों को पंख तो दो, आसमान में उड़ान उन्हें भरनी आती है। परिवार का साथ मिले तो बेटियों के लिए आसमान छूना मुश्किल नहीं होता। थार की बेटी प्रियदर्शनी राजपुरोहित को भी परिवार का साथ मिला तो उसने भारतीय वायुसेना में जाने का सपना साकार कर दिखाया।
रेगिस्तान की धरती की बेटी प्रियदर्शनी राजपुरोहित ने भारतीय वायुसेना में अग्निवीर वायु वीर के रूप में चयन होने पर गृह जिले में प्रियदर्शनी का राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर, एनसीसी, थार के वीर संस्थान, माय भारत सहित विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं की ओर से एनसीसी के कैडेट ने तिरंगा रैली निकालकर उनका स्वागत किया और शुभकामनाएं दीं। स्मृति चिह्न, पुष्पमाला और साफा भेंट कर सम्मान किया गया। एनसीसी अधिकारी डॉ. आदर्श किशोर ने बताया कि बतौर एनसीसी कैडेट प्रियदर्शनी शुरू से ही जुनूनी रही है। उनके चयन ने बाड़मेर की बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। प्राचार्य डॉ. मृणाली चौहान ने प्रियदर्शनी को रोल मॉडल बताते हुए बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। थार के वीर संस्थान के संस्थापक रघुवीरसिंह तामलोर ने प्रियदर्शनी के चयन को नया अध्याय बताया। इस अवसर पर माय भारत के जिला समन्वयक पंकज माड़ेचा, प्रोफेसर मुकेश जैन और थार के वीर संस्थान के दिनेशपाल सिंह लखा ने भी संबोधित किया।
प्रियदर्शनी राजपुरोहित ने अपनी सफलता का संघर्ष साझा करते हुए बताया कि भारतीय वायुसेना तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं था। पहली कोशिश में वह सिर्फ 0.25% अंकों से चूक गई थी। इसके बाद उन्होंने खुद को 6 महीने के लिए एक कमरे तक सीमित कर दिया था क्योंकि वह अपने परिणाम की वदह से काफी निराष हो गई थी। लेकिन उसके बाद परिवार और टीचर्स के मार्गदर्शन के बाद उन्होंने वापस पूरे लग्न के साथ मेहनत की और यह जीत हासिल की।
अपने अनुभव साझा करते हुए प्रियदर्शनी राजपुरोहित ने कहा कि भारतीय वायुसेना में सेवा करना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने युवाओं से मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस दौरान सहायक आचार्य वीरसिंह, अरविंद खत्री, कैलाश चौधरी, नरेंद्रसिंह तामलोर, गजेंद्र सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।