बाड़मेर

IAS Success Story : आखिरी कोशिश में मिली UPSC में 287वीं रैंक, पढ़ें बालोतरा के जितेंद्र प्रजापत की प्रेरक कहानी

IAS Success Story : लगातार असफलताओं के बावजूद जितेंद्र प्रजापत की हिम्मत नहीं हारने की जिद आखिरकार रंग लाई। बालोतरा के जितेंद्र प्रजापत ने यूपीएससी में 287वीं रैंक पाई। पढ़ें जितेंद्र प्रजापत के संघर्ष की प्रेरक कहानी।

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बालोतरा। सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मिलने के बाद जितेंद्र प्रजापत के साथ खुशी मनाते साथी मित्र। फोटो पत्रिका

IAS Success Story : लगातार असफलताओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारने की जिद आखिरकार रंग लाई। नौवां और आखिर मौका था, जितेंद्र प्रजापत ने अपना सब कुछ दांव पर लगा रखा था। शुक्रवार को जब UPSC 2026 का Result आया तो जितेंद्र प्रजापत खुशी से चीख पड़े। आंखों से पानी रुक नहीं था। कई बार रिजल्ट में अपना नम्बर देख रहे थे। जब आंखों ने तय कर लिया और मन ने मान लिया कि अब उनका सपना पूरा हो गया है और वो आईएएस बन गए है। तब उन्होंने राहत की सांस ली। जितेंद्र प्रजापत की प्रेरक कहानी आपको भी हिम्मत देगी, पढ़ें।

बालोतरा शहर के नयापुरा निवासी जितेंद्र पुत्र मोतीलाल प्रजापत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में 287वीं रैंक हासिल कर नौवें और आखिरी प्रयास में सफलता प्राप्त की है। साधारण परिवार से आने वाले जितेंद्र की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

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पिता चलाते हैं एक निजी कंपनी में कैंटीन

जितेंद्र पिछले 6 वर्षों से दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे। वर्ष में केवल एक बार ही बालोतरा आते थे। परिवार के सदस्य रामेश्वरलाल प्रजापत ने बताया कि जितेंद्र के पिता मोतीलाल प्रजापत गुजरात के गांधीधाम में एक निजी कंपनी में कैंटीन चलाते हैं।

बहन है चार्टर्ड अकाउंटेंट

परिवार में दो भाई और एक बहन हैं। बड़ा भाई पिता के साथ कैंटीन का काम संभालता है, जबकि बहन चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) है।

नौवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की

जितेंद्र ने गुजरात से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बार-बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास जारी रखा। आठ बार प्रयास करने के बाद जब सफलता नहीं मिली तो भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और नौवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर दी।

अपनी शादी भी टाल दी थी

जितेंद्र का सपना आईएएस बनने का था। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी शादी भी टाल दी थी। परिवार के अनुसार दो वर्ष पहले उनका विवाह होना था, लेकिन उन्होंने आईएएस बनने के बाद ही शादी करने का निर्णय लिया।

अब 21 अप्रेल को मोकलसर के पास बावड़ी निवासी एक युवती के साथ उनका विवाह होगा। जितेंद्र की इस उपलब्धि पर बालोतरा शहर में परिजनों में खुशी का माहौल है।

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Published on:
07 Mar 2026 11:30 am
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