बाड़मेर

गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन: विधायक रविंद्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत, फिर भी धरने पर डटे रहे

बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस में विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी नौवें दिन धरने पर मौजूद रहे। धरने के आठवें दिन रात को लगातार थकावट और भीषण गर्मी के बीच विधायक की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
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May 14, 2026
Giral Lignite Mines Protest
गिरल माइंस आंदोलन में बिगड़ी विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत (पत्रिका फोटो)

Ravindra Singh Bhati Health Update: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर चल रहा जन-आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है। बुधवार को आंदोलन के नौवें दिन भी श्रमिकों और ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ। भीषण गर्मी और तपती धूप की परवाह किए बिना सैकड़ों प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत अचानक बिगड़ने से क्षेत्र में तनाव और चिंता बढ़ गई है।

आंदोलन के आठवें दिन की रात, लगातार थकान और लू के थपेड़ों के कारण विधायक रविंद्र सिंह भाटी का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। उन्हें तेज बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत हुई। सूचना मिलते ही नजदीकी राजकीय अस्पताल से डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और धरना स्थल पर ही उनका प्राथमिक उपचार किया गया।

डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन भाटी ने अस्पताल जाने या धरना छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ग्रामीणों और श्रमिकों की जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

क्यों हो रहा है गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन?

यह आंदोलन केवल श्रमिकों की छंटनी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पिछले कई वर्षों से संचित हो रहे जन-आक्रोश का परिणाम है। माइंस प्रबंधन द्वारा स्थानीय श्रमिकों को काम से निकाले जाने और उनके वेतन विसंगतियों को लेकर भारी रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने Corporate Social Responsibility (CSR) के तहत क्षेत्र के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आ रहा।

खनन क्षेत्र के आसपास के गांवों में आज भी सड़क, शुद्ध पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। खनन के कारण उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसके मुआवजे या सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन की चुप्पी

धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी और प्रशासन उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि माइंस से निकलने वाले संसाधनों पर पहला हक स्थानीय लोगों का है, लेकिन उन्हें ही हाशिए पर धकेला जा रहा है।

वर्तमान में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन वार्ता के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में हैं। वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी अपनी सभी मांगें लिखित में माने जाने तक हटने को तैयार नहीं हैं। विधायक भाटी की मौजूदगी ने इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

Published on:
14 May 2026 09:16 am