ब्यावर

विदा हुआ सबका लाडला ‘डॉग-सा’: दुख में साथ निभाने वाले बेजुबान के लिए पूरा गांव रो पड़ा

एक आवारा कुत्ते ‘डॉग-सा’ को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इंसानों की तरह शवयात्रा निकली, भजन बजे और हिंदू रीति से अंतिम संस्कार हुआ। हिंदू-मुस्लिम सभी ग्रामीण शामिल हुए। डॉग-सा गांव में हर शोक के समय साथ निभाने के लिए जाना जाता था।
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Jan 24, 2026
Rajasthan Stray Dog Funeral
डॉग-सा’ की अंतिम विदाई (फोटो सोशल मीडिया)

Rajasthan Stray Dog Funeral: ब्यावर: राजस्थान के ब्यावर जिले के राजियावास गांव में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जिसने इंसान और जानवर के रिश्ते को नई परिभाषा दे दी। यहां एक आवारा कुत्ते को पूरे गांव ने सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।

बता दें कि गांव वाले उसे प्यार और आदर से ‘डॉग-सा’ कहकर बुलाते थे। ‘सा’ शब्द राजस्थान की संस्कृति में सम्मान का प्रतीक माना जाता है और यही संबोधन वर्षों से उस कुत्ते के लिए अपनाया गया था, जो न किसी एक घर का था और न ही पूरी तरह बेसहारा।

तीन जनवरी को हुई मौत

तीन जनवरी की सर्द सुबह जब डॉग-सा की मौत हुई तो गांव में एक अजीब सी उदासी छा गई। यह शोक किसी इंसान के जाने का नहीं था, लेकिन भावनाएं वैसी ही थीं। गलियों में रोज नजर आने वाली वह मौजूदगी अचानक गायब हो गई थी।

गांव के लोगों में इस बात को लेकर कोई दुविधा नहीं थी कि अंतिम संस्कार कैसे होगा। सभी की एक ही राय थी डॉग-सा को वही सम्मान मिलेगा, जो उसने अपने व्यवहार और संवेदनशीलता से अर्जित किया था।

अंतिम यात्रा निकाली गई

ग्रामीणों ने स्वेच्छा से पैसे और लकड़ी इकट्ठा की। एक पिकअप वाहन की व्यवस्था की गई, अर्थी सजाई गई और भजनों के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। डीजे वाहन में रामधुन बज रही थी और करीब 100 से अधिक ग्रामीण पिकअप के पीछे-पीछे पैदल चल रहे थे। यह दृश्य किसी बुजुर्ग परिजन की शवयात्रा जैसा लग रहा था। गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी इस विदाई में शामिल हुए।

राजियावास ग्राम पंचायत के सरपंच ने क्या बताया

राजियावास ग्राम पंचायत के सरपंच बृजपाल सिंह रावत बताते हैं, डॉग-सा की सबसे खास बात उसकी संवेदनशीलता थी। गांव में जब भी किसी घर में मृत्यु होती, चाहे वह हिंदू परिवार हो या मुस्लिम, डॉग-सा वहां जरूर पहुंचता। अंतिम यात्रा निकलती तो वह श्मशान या कब्रिस्तान तक पीछे-पीछे जाता।

संस्कार के दौरान वहीं बैठा रहता और इसके बाद करीब 12 दिनों तक शोकाकुल परिवार के आसपास मंडराता रहता। मुस्लिम समुदाय में निधन होने पर भी वह कब्रिस्तान तक जाता। ग्रामीणों के अनुसार, उसकी निष्ठा किसी धर्म से नहीं, बल्कि दुख और इंसानियत से जुड़ी थी।

हिंदू रीति से हुआ अंतिम संस्कार

श्मशान घाट पर डॉग-सा का अंतिम संस्कार लकड़ी से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी पूरी श्रद्धा के साथ मौजूद रहे। गांव वालों का कहना है कि यह कोई असाधारण घटना नहीं, बल्कि वर्षों में बने उस रिश्ते का स्वाभाविक परिणाम था, जो डॉग-सा और ग्रामीणों के बीच विकसित हुआ।

Updated on:
24 Jan 2026 03:21 pm
Published on:
24 Jan 2026 03:05 pm