AAP Vs BJP: AAP ने BJP में शामिल हुए अपने 7 राज्यसभा सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने राष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष से शिकायत कर उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग रखने का फैसला लिया है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है।
AAP Vs BJP: हाल ही में आम आदमी पार्टी से सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया। अब इस पर आम आदमी पार्टी ने सांसदों के इस एक्शन पर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी अब इस मामले को संवैधानिक स्तर पर उठाने की प्लनिंग कर रही है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत करने का फैसला लिया है। पार्टी का कहना है कि सांसदों के इस एक्शन पर कार्रवाई जरूरी है।
AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने साफ कहा कि वह इन सातों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे। उनके अनुसार, यह कदम संसदीय नियमों और संविधान के खिलाफ भी है। उन्होंने यह भी बताया कि वह राज्यसभा सभापति को ऑफिशियली पत्र लिखकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की अपील करेंगे। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। वह पंजाब से चुने गए सांसदों को वापस बुलाने(रिकॉल) की मांग रखने वाले हैं।
राघव चड्ढा के नेतृत्व में सात राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर BJP जॉइन कर ली। इनमें शामिल हैं- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल। इनमें से कुछ सांसदों ने शुक्रवार को ही BJP जॉइन कर ली थी और स्वाति मालीवाल ने शनिवार को पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी।
बागी सांसदों का कहना है कि वे दो-तिहाई संख्या में हैं और BJP में विलय कर सकते हैं। लेकिन इस पर कानूनी बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के अनुसार, किसी भी पार्टी का दूसरी पार्टी में जाने का फैसला पूरी पार्टी को मिलकर लेना होता है। केवल कुछ सांसदों के जाने से इसे वैध नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि अब यह मामला कानूनी बहस का भी हिस्सा बन गया है।
इस पूरे मामले के बाद राजनीति और भी तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने BJP पर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले AAP को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। वहीं संजय सिंह ने भी कहा कि अशोक मित्तल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद से स्थिति साफ होने लगी थी। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं पर पहले आरपो लगाए जा रहे थे, अब पार्टी में शामिल होने के बाद वह साफ हो गए हैं।
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे पार्टी को अंदर से कमजोर किया जा सके। दूसरी तरफ BJP ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। दिल्ली BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि AAP के नेता निराश होकर ऐसी बातें कर रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी छोड़ने वाले सभी सांसद समझदार और अनुभवी हैं, और वे काफी समय से AAP में खुश नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपनी इच्छा से खुद ही पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।