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चातुर्मास के चार महीनों में खान-पान के 4 नियम, क्यों दूर रखी जाती हैं हरी सब्जी, दूध और दाल? जानिए आयुर्वेदिक कारण

Chaturmas Food Rules: चातुर्मास आते ही मंदिरों में पूजा और साधना बढ़ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं इन चार महीनों में खाने की थाली भी बदल जाती है? जानिए इसके पीछे छिपे धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण (Ayurveda Diet)।
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Aug 07, 2026
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Chaturmas Food Rules: आयुर्वेद के अनुसार चातुर्मास के चार महीने क्या खाए और क्या नहीं? (फोटो सोर्स -Chatgpt)

Ayurveda Diet: चातुर्मास (Chaturmas 2026) शुरू होते ही मंदिरों में आराधना, व्रत और साधना का क्रम तेज हो गया है। लेकिन इसकी सीख केवल पूजा तक सीमित नहीं है। इन चार महीनों में थाली भी बदलती है। कभी हरी सब्जियां छूटती है, कभी दही, तो कभी दूध और दालों पर विराम लग जाता है।

मानसून के बाद बदल जाता है खान-पान

पहली नजर में ये नियम धार्मिक परंपरा लगते हैं, लेकिन आयुर्वेद इन्हें बदलते मौसम में शरीर की सुरक्षा का वैज्ञानिक तरीका मानता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है और बैक्टीरिया व संक्रमण तेजी से फैलते हैं, ऐसे में चातुर्मास का खान-पान शरीर को बीमारियों से बचाने का प्राकृतिक सुरक्षा कवच बन जाता है। यही वजह है कि इस दौरान सात्विक भोजन, हल्का आहार और तले-भुने व ज्यादा मसालेदार व्यंजनों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार क्या खाना चाहिए?

सीसीआरएएस ग्वालियर के वरिष्ठ आयुर्वेद अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल मंगल के अनुसार, वर्षा ऋतु में वात दोष बढ़ता है, शरीर का बल और जठराग्नि दोनों कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में भोजन में स्निग्ध और गर्म प्रकृति के पदार्थ शामिल करना चाहिए। पुराने जौ और गेहूं का सेवन लाभकारी माना गया है। हल्का व्यायाम करें। ठंडे खाद्य पदार्थ, नया अनाज, अधिक पानी पीना और दिन में सोने जैसी आदतों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे श्वास रोग, बुखार और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

हर महीने बदलता नियम, जानिए किस महीने क्या छोड़ें (Chaturmas Food Rules)

सावन (30 जुलाई-28 अगस्त) हरी पत्तेदार सब्जियों से दूरी- बरसात की नमी पालक, मैथी जैसी पत्तेदार सब्जियों में कीड़े. फफूंद और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ा देती है। इनके सेवन से पेट के संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

भाद्रपद (29 अगस्त-26 सितंबर) दही को कहें विराम- आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में दही कफ और पित्त को बढ़ा सकता है। इससे अपच, एसिडिटी, सर्दी-जुकाम, त्वचा संबंधी समस्याएं और जोड़ों के दर्द की आशंका बढ़ जाती है।

आश्विन (27 सितंबर-26 अक्टूबर) दूध का संयमित सेवन- इस समय पाचन क्षमता सामान्य से कमजोर रहती है. इसलिए दूध जैसे अपेक्षाकृत भारी खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।

कार्तिक (27 अक्टूबर-24 नवंबर) दालों से परहेज- परंपरा में इस अवधि में दालों का सेवन कम करने की बात कही गई है. ताकि वात दोष संतुलित रहे और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

Updated on:
07 Aug 2026 02:53 pm
Published on:
07 Aug 2026 02:53 pm