PM Modi speech controversy: चुनाव के बीच PM मोदी के भाषण को लेकर विवाद बढ़ गया है। 700 से ज्यादा नागरिकों ने चुनाव आयोग में शिकायत कर MCC उल्लंघन का आरोप लगाया है। जानें पूरा मामला।
PM Modi speech controversy: चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन ने नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। 700 से ज्यादा लोगों ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (Election Commission of India) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि यह भाषण चुनावी आचार संहिता के दौरान दिया गया और इस भाषण से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। इस वजह से इसका असर निष्पक्ष चुनाव के नियमों पर असर पड़ सकता है। शिकायत करने वालों में पूर्व अधिकारी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं। इनका मानना है कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को तुरंत जांच करनी चाहिए।
20 अप्रैल को इलेक्शन कमीशन को शिकायत पत्र भेजा गया जिसमें नागरिकों ने आरोप लगाया कि 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन चुनावी प्रचार जैसा था। उनका कहना है कि यह भाषण सरकारी प्लेटफॉर्म जैसे दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित हुआ, जिससे सत्ता दल को अनुचित फायदा मिला।
आपको बता दें कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में आचार संहिता लगी है। यहां 4 मई को मतगणना होने वाली है। शिकायत करने वालों का मानना है कि चुनाव के समय सरकारी साधनों का इस तरह इस्तेमाल करना आचार संहिता के नियमों के खिलाफ हो सकता है।
शिकायत में कहा गया कि भाषण का कंटेंट और उसके प्रसारण के तरीके दोनों पर जांच होनी चाहिए। नागरिकों ने मांग की कि अगर प्रसारण के लिए अनुमति दी गई थी, तो विपक्षी दलों को भी उतना ही एयरटाइम दिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर भाषण में आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन किया गया हो तो उसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से हटाने की भी मांग की गई है।
शिकायत पत्र पर कई जाने-माने चेहरों के नाम शामिल हैं, जैसे पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार टीएम कृष्णा और पूर्व सचिव ईएएस शर्मा। उन्होंने आयोग से अपील की है कि वह चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई करे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकसभा में 131वां संवैधानिक संशोधन पास नहीं हो पाना महिलाओं के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने कांग्रेस, DMK, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी वजह से यह बिल आगे नहीं बढ़ सका। आगे उन्होंने कहा कि अगर यह कानून पास हो जाता, तो महिलाओं को ज्यादा मजबूत प्रतिनिधित्व मिल पाता। उसके बाद उन्होंने सरकार की तरफ देश की महिलाओं से माफी मांगी। साथ ही प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राष्ट्र के हित से ऊपर राजनीतिक हितों को रखा और संसद में उनका व्यवहार महिलाओं की गरिमा पर हमला था।