भरतपुर

Bharatpur : आर्थिक संकट के बीच दीपावली मनाने को मजबूर हैं पुजारी, मानदेय और भोग राशि का अब भी है इंतजार

Bharatpur : भरतपुर. संभाग के राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिरों में भगवान की पूजा-सेवा करने वाले पुजारी इस बार आर्थिक संकट के बीच दीपावली मनाने को मजबूर है।
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Updated: 6 Nov 2026, 2:43 PM IST
bharatpur priests compelled to celebrate diwali amidst a financial crisis
Bharatpur : प्रतीकात्मक फोटो इसे एआई से बनाया गया है।

Bharatpur : भरतपुर. संभाग के राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिरों में भगवान की पूजा-सेवा करने वाले पुजारी इस बार आर्थिक संकट के बीच दीपावली मनाने को मजबूर है। तीन महीने से मानदेय और भोग-प्रसादी की राशि का इंतजार कर रहे पुजारियों को दीपावली से पहले भुगतान की उम्मीद थी, लेकिन राहत देने के बजाय देवस्थान विभाग ने पांच दिवसीय दीपावली पर्व की सजावट और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च भी उनके जिम्मे डाल दिया है। इससे पुजारियों की परेशानी और बढ़ गई है। दरअसल, अब तक दीपावली पर संभाग के सभी 57 मंदिरों में सजावट और रोशनी की व्यवस्था के लिए सरकार की ओर से प्रति मंदिर दो लाख रुपए का बजट दिया जाता था। देवस्थान विभाग इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर फर्म के माध्यम से व्यवस्थाएं करवाता था। लेकिन इस बार टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में विभाग ने प्रत्येक मंदिर के पुजारी को 50 हजार रुपए तक खर्च कर दीपावली की व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

पिछली बार घोटाले में फर्म हुई थी ब्लैकलिस्ट

मंदिरों में सजावट और भोग-प्रसादी के नाम पर अनियमितताओं का मामला पहले भी सामने आ चुका है। पिछली बार सजावट का काम करने वाली फर्म को घोटाले के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। ऐसे में कई फर्म तो आगे ही नहीं आई। वहीं टेंडर प्रक्रिया में केवल एक फर्म ने रुचि दिखाई, लेकिन उसकी दरें अधिक होने के कारण टेंडर नहीं हो सका। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू होने के कारण टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाना संभव नहीं था। इसके चलते विभाग ने पुजारियों को ही खर्च की जिम्मेदारी सौंप दी।

मानदेय और भोग राशि का अब भी इंतजार

एक ओर पुजारियों को पिछले तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है, वहीं प्रत्येक मंदिर को मिलने वाली तीन हजार रुपए की मासिक भोग-प्रसादी राशि भी अटकी हुई है। ऐसे में जिन पुजारियों को खुद अपने बकाया भुगतान का इंतजार है, उन्हें अब दीपावली की सजावट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी खर्च जुटाना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब विभाग बजट और टेंडर की व्यवस्था नहीं कर पाया तो त्योहार की व्यवस्थाओं का आर्थिक बोझ पुजारियों पर क्यों डाल दिया गया?

प्रति मंदिर दो लाख रुपए के हिसाब से आया है बजट

दीपावली सजावट के लिए इस बार भी प्रति मंदिर दो लाख रुपए के हिसाब से ही बजट आया है। मगर टेंडर नहीं होने के कारण इस बार यह जिम्मा पुजारियों को सौंपा है। इसके लिए जिलेवार ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। त्योहार के बाद पुजारी मंदिरों में किए गए कार्यों का बिल विभाग में प्रस्तुत करेंगे, कमेटी की ओर से सत्यापन में सही पाए जाने पर पुजारियों को भुगतान किया जाएगा।
ओमप्रकाश, सहायक आयुक्त, देवस्थान

Updated on:
6 Nov 2026, 2:43 PM IST
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