भरतपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्यों के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सामने आया है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद रियासतकालीन झंडे को लेकर स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई है।
भरतपुर। पिछले करीब पांच साल से चल रहा पूर्व राजपरिवार के सदस्यों के बीच का विवाद फिर गहरा गया है। पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया में किए एक पोस्ट से गुरुवार को खलबली मच गई है। उन्होंने 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल के जन्मदिवस के अवसर पर खुद मोती महल जाकर रियासत का झंडा लगाने की बात कही है।
बता दें कि पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह, पत्नी पूर्व सांसद दिव्या सिंह व बेटे अनिरूद्ध के बीच पिछले काफी समय से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। विवाद के बीच पूर्व राजपरिवार के मोती महल से रियासत का झंडा हटाने को लेकर अगस्त 2025 में विवाद हो गया था। उस समय विश्वेंद्र सिंह ने मोती महल पर राष्ट्रीय ध्वज लगने के बाद 21 सितंबर 2025 को प्रस्तावित महापंचायत को स्थगित कर दिया था।
भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में पिछले पांच सालों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर ही था कि मेरी पत्नी व बेटे ने भरतपुर का रियासतकालीन झंडा अभी तक नहीं लगाने के कारण ये विवाद फिर से उलझ गया है। या तो मेरी पत्नी व बेटा भरतपुर रियासत के झंडे को फिर से लगा दें, नहीं तो मैं स्वयं 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल के जन्मदिवस के अवसर पर मोती महल जाकर रियासतकालीन झंडा लगाऊंगा। हालांकि रियासतकालीन झंडे की रस्सी व तार काट दिया गया है। मैं तब भी झंडे को फहरा कर आऊंगा। किसी में हिम्मत है तो रोककर दिखा देना मुझे।
मैं साफ कह चुका हूं कि अब रियासतकालीन झंडा लगकर ही रहेगा। खुद 13 फरवरी को मोती महल जाकर झंडा फहराऊंगा। पुलिस-प्रशासन को भी स्पष्ट कह चुका हूं कि मेरे इस निर्णय का विरोध करने की कोई कोशिश नहीं करे।