भरतपुर

Panchana Dam: किसानों को पानी के बंटवारे पर बनी सहमति, 50 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई परियोजना जल्द होगी शुरू

Panchana Dam Dispute: सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि सरकार की ओर से बजट घोषणा में 50 करोड़ की पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना स्वीकृत की है। जिसका कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।
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Jun 20, 2026
Panchana Dam
पांचना बांध। पत्रिका फाइल फोटो

भरतपुर। पांचना बांध से सिंचाई के पानी को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया की अध्यक्षता में प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों के साथ कैचमेंट एवं कमांड क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी तथा बांध का पानी क्षेत्र के सभी किसानों के काम आए इस पर सहमति व्यक्त की। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि सरकार की ओर से बजट घोषणा में 50 करोड़ की पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना स्वीकृत की है। जिसका कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।

कैचमेंट एरिया के किसान प्रतिनिधियों ने कार्य को धरातल पर जल्दी शुरू करवाने की मांग की। वहीं कमांड एरिया के किसान प्रतिनिधियों ने न्यायालय के आदेशों की पालना में नहरों में पानी छोड़ने की मांग रखी। दोनों पक्षों के किसानों ने बैठक में यह आश्वासन दिया कि एक दूसरे के खिलाफ नकारात्मक एवं जातिगत टिप्पणियां नहीं करेंगे तथा दोनों पक्ष निरंतर संवाद बनाए रखकर सरकार का सहयोग करेंगे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया एवं सकारात्मक माहौल में वार्ता कर सर्वसहमति का आह्वान किया।

बैठक में इनकी रही मौजूदगी

पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर रेंज कैलाश चन्द्र विश्नोई, कलक्टर करौली अक्षय गोदारा, कलक्टर सवाईमाधोपुर कानाराम, एसपी करौली लोकेश सोनवाल, सवाई माधोपुर एसपी जयेष्ठा मैत्रयी, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। कैचमेंट एरिया से करौली विधायक दर्शन सिंह, अशोक धाभाई, हाकिम सिंह, रामस्वरूप, कमांड क्षेत्र के किसानों की ओर से रघुवीर प्रसाद मीणा, महेंद्र सिंह, तेज सिंह व सदस्यों ने भाग लिया।

यह है विवाद

करौली में गुड़ला के पांचना बांध पर 39 गांवों के लोग एक महीने से बांध पर पहरा दे रहे हैं, क्योंकि हाईकोर्ट मई में तीसरी बार बांध का पानी जल्द कमांड क्षेत्र की नहर में छोड़ने का आदेश दे चुका है। सरकार न तो नहरें रोकने वाले गांवों को बांध का पानी दिलवा पाई, न ही कमांड क्षेत्र के किसानों को उनका अधिकार मिला है। यह विवाद वर्ष 2006 से चल रहा है।

साल में सिर्फ 1 बार खुलता है 'थोड़ा पानी'

वक्त के साथ यह जल संकट केवल खेती और सिंचाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दो बड़े समाजों के बीच आपसी वर्चस्व और सामाजिक वैमनस्य की वजह बन गया है। वर्ष 2006 में हुए बड़े गुर्जर आंदोलन के बाद से ही डूब क्षेत्र के ग्रामीणों ने पांचना बांध पर कड़ा पहरा लगा रखा है और नहरों के गेट खोलने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। तनाव का आलम यह है कि पिछले 20 सालों में इस बांध से नहरों के जरिए खेतों के लिए नियमित पानी कभी नहीं छोड़ा गया। पूरे साल में सिर्फ एक बार प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल श्रीमहावीरजी मेले के दौरान भगवान के अभिषेक के लिए ही बहुत सीमित मात्रा में पानी नदी के रास्ते आगे भेजा जाता है। वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर महापंचायतें बुलाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना खतरे में पड़ गया है।

Updated on:
20 Jun 2026 07:45 am
Published on:
20 Jun 2026 07:45 am