
Bhilai Township Electricity Tariff: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से धीरे-धीरे पीछे हटने के बाद अब भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) बिजली वितरण व्यवस्था से भी हाथ खींचने की तैयारी में है। बीएसपी ने भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है। प्रस्ताव पर 21 अगस्त को दोपहर तीन बजे आयोग कार्यालय में सुनवाई होगी। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो टाउनशिप के करीब 35 हजार आवासों और आठ हजार से अधिक दुकानों पर अगले तीन वर्षों तक बढ़ी हुई बिजली दरों का असर पड़ेगा।
साथ ही, बीएसपी द्वारा बिजली वितरण लाइसेंस राज्य सरकार को लौटाने की तैयारी की चर्चा भी तेज हो गई है। इसे लेकर सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि यदि बीएसपी बिजली व्यवस्था से हटना चाहता है तो पहले टाउनशिप की अतिरिक्त भूमि राज्य सरकार को सौंपनी चाहिए।
सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने कहा कि बीएसपी हर बार बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रयास करता है। इस बार भी प्रस्ताव का आयोग के समक्ष विरोध किया जाएगा, ताकि टाउनशिप के रहवासियों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए चेंबर पूरी ताकत से अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा।
चेंबर ने टाउनशिप में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। जैन का कहना है कि बीएसपी जिस एजेंसी से स्मार्ट मीटर लेने की तैयारी कर रहा है, उसी एजेंसी ने राज्य सरकार को भी मीटर उपलब्ध कराए हैं। उनका तर्क है कि यदि खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई जाए तो कम कीमत पर मीटर खरीदे जा सकते हैं। राज्य सरकार ने स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं किए हैं, इसलिए टाउनशिप पर थोपा जाना चाहिए।
चेंबर ने सवाल उठाया है कि बीएसपी का टाउन इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रिकल) विभाग स्वयं एक लाइसेंसधारी संस्था है, फिर वह बिजली वितरण का लाइसेंस क्यों लौटाना चाहता है। उनका कहना है कि शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं की तरह क्या अब बीएसपी बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी से भी पीछे हट रहा है। सूत्रों के अनुसार, बिजली चोरी के कारण हर साल करोड़ों नुकसान होता है।
भिलाई स्टील प्लांट के जनसंपर्क विभाग के मुताबिक लाइसेंस सरेंडर (समर्पण) याचिका दायर कर दी गई है। टैरिफ याचिका की सुनवाई स्वप्रेरणा श्रेणी के अंतर्गत निर्धारित है। यह प्रत्येक वर्ष होने वाली एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें हम पूंजीगत व्यय से संबंधित आंकड़े, डेटा प्रस्तुत करते हैं।