भिलाई

अब बिना CA के भरें ITR, दुर्ग के प्रोफेसरों ने बनाया AI टैक्स सिस्टम, जानें पूरी प्रक्रिया

Bhilai News: आयकर रिटर्न (ITR) भरना अब आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। दुर्ग के प्रोफेसरों द्वारा विकसित एआई आधारित टैक्स सिस्टम की मदद से अब बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के भी सटीक और सरल तरीके से रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

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Apr 27, 2026
अब बिना CA के भरें ITR (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरना अब आम लोगों के लिए पहले जितना जटिल नहीं रहेगा। दुर्ग साइंस कॉलेज के प्रोफेसरों द्वारा एक एडवांस एआई आधारित टैक्स कैलकुलेशन एवं प्रोसेसिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद के भी आईटीआर फॉर्म को सटीकता से भर सकेगा। उपयोगकर्ता द्वारा आय, खर्च, बचत और पीएफ जैसी जानकारी दर्ज करते ही यह सॉफ्टवेयर स्वत: टैक्स की गणना कर देगा और पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन करेगा।

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सिस्टम की खासियत

इस सिस्टम की खासियत यह है कि यदि उपयोगकर्ता किसी नियम या प्रक्रिया में अटकता है, तो सॉफ्टवेयर उसी स्थान पर सरल भाषा में संबंधित कानून और नियमों की जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इससे अलग से इंटरनेट पर खोज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट पर प्रो. शैलेंद्र भदोरिया के साथ डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. अदिति, डॉ. शशि कश्यप और डॉ. हरिश कश्यप कार्य कर रहे हैं। इस नवाचार को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है।

लोगों की समस्या को ध्यान में रखकर तैयार

प्रोफेसरों के अनुसार, देश में बड़ी संख्या में लोग केवल प्रक्रिया की जटिलता के कारण समय पर आईटीआर दाखिल नहीं कर पाते। लॉगिन, विभिन्न फॉर्म और नियमों को समझना आम व्यक्ति के लिए कठिन होता है। ऐसे में लोग सीए या साइबर कैफे पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए इस सिस्टम को सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है।

मशीन लर्निंग से मिलेगा सटीक परिणाम

यह सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है, जो पुराने डेटा और टैक्स पैटर्न का विश्लेषण कर सटीक गणना करता है। साथ ही, यह नए टैक्स नियमों के अनुसार स्वयं को अपडेट भी करता रहता है। सिस्टम गलत एंट्री, डुप्लीकेट डेटा और अन्य त्रुटियों की पहचान कर उन्हें सुधारने में मदद करता है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है। इसमें एक सरल डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिसे कोई भी आसानी से उपयोग कर सकेगा।

समय, पैसा और मेहनत की होगी बचत

डॉ. अजय कुमार सिंह, प्राचार्य के मुताबिक, यह सिस्टम आम लोगों के समय, पैसे और मेहनत तीनों की बचत करेगा। इससे अधिक लोग आसानी से आईटीआर फाइल कर सकेंगे। फिलहाल यह सिस्टम पेटेंट के प्रारंभिक चरण को पार कर चुका है और इसे और बेहतर बनाने के लिए शोध जारी है। पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद इसे आयकर विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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Published on:
27 Apr 2026 06:02 pm
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