भिलाई

दिवाली की आड़ में चुनावी बिसात, पोस्टर पॉलिटिक्स से चेहरा चमकाने में जुटे दावेदार, जनता का सवाल- 5 साल कहां थे नेताजी?

Diwali Poster Politics: भिलाई नगर निगम चुनाव में अभी दो महीने का समय बाकी है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने दिवाली की शुभकामनाओं के बहाने प्रचार शुरू कर दिया है। शहर के चौक-चौराहों और वार्डों में पोस्टर, होर्डिंग और कटआउट के जरिए अपनी पहचान चमकाने की होड़ मची है।
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Updated: 24 Oct 2026, 9:52 AM IST
Civic Elections
दिवाली की आड़ में चुनावी बिसात (फोटो सोर्स- AI)

Civic Elections: भिलाई नगर पालिक निगम चुनाव में भले ही अभी दो महीने का समय बाकी है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार का नया और सुरक्षित रास्ता निकाल लिया है। सीधे वोट मांगने के बजाय त्योहारों की आड़ लेकर जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों, गली-मोहल्लों और बिजली के खम्भों पर दीपावली की शुभकामनाओं वाले बड़े-बड़े होर्डिंग, कटआउट और पोस्टरों की बाढ़ आ गई है।

पहचान बनाने की दोहरी चाल

दावेदारों की इस रणनीति के पीछे दो प्रमुख वजहें हैं। पहली यह कि सीधे तौर पर उम्मीदवारी जताने से विरोधी गुट सक्रिय होकर पार्टी स्तर पर टिकट कटवाने की कोशिशें शुरू कर सकते हैं। दूसरी यह कि बधाई संदेशों के जरिए बिना किसी चुनावी विवाद के हर घर तक नाम और चेहरा आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

पोस्टरों में शीर्ष पर देवी-देवताओं और वरिष्ठ नेताओं के चित्र हैं, बीच में दावेदार का बड़ा फोटो और नीचे 'आपका अपना, वार्ड का बेटा' जैसे भावनात्मक नारे लिखे जा रहे हैं। कुछ दावेदार तो पोस्टरों पर क्यूआर कोड भी लगवा रहे हैं, ताकि लोग सीधे उनके सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़ सकें। इसके साथ ही कई इलाकों में मिठाई, दीया और तेल के पैकेट बांटने की भी तैयारी है।

आरक्षण बदलते ही पड़ोसी वार्डों में शिफ्टिंग शुरू

वार्ड आरक्षण की स्थिति तय होने के बाद कई दिग्गज नेताओं की जमीन खिसक गई है। जिन दावेदारों के अपने वार्ड आरक्षित हो चुके हैं, वे अब पड़ोसी सामान्य वार्डों में संभावनाएं तलाश रहे हैं। आलम यह है कि रातों-रात पड़ोसी वार्डों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिसके चलते एक ही खंभे पर अलग-अलग दलों के कई दावेदारों के पोस्टर एक-दूसरे के ऊपर चिपके नजर आ रहे हैं।

जागरूक मतदाता भी ले रहे परीक्षा

इधर, वार्डों की जनता भी नेताओं की इस मौसमी सक्रियता को भली-भांति समझ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बधाई देने वालों की कतार लग जाती है, लेकिन जीत दर्ज करने के बाद ये चेहरे पांच साल तक गायब रहते हैं। कई मोहल्लों में जागरूक नागरिक पोस्टरों पर लिखे मोबाइल नंबरों पर कॉल करके सीधे नाली, सडक़ और सफाई की समस्याएं गिनाने लगे हैं, जिससे बधाई की आड़ में चेहरा चमकाने निकले दावेदारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

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24 Oct 2026, 9:52 AM IST
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