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Bhilai News: 2027 से B.SC एग्रीकल्चर की पढ़ाई! ऑनर्स और मल्टीपल एग्जिट का विकल्प, जानें पूरा प्लान

Agriculture Science Course: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में सत्र 2027-28 से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। कार्यपरिषद ने कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है।
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भिलाई

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Khyati Parihar

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Updated: 23 Oct 2026, 9:17 AM IST

Agriculture Science Course

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (फोटो सोर्स- पत्रिका)

भिलाई@मोहम्मद जावेद। BSc Agriculture 2027: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में अब कृषि विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। विवि की कार्यपरिषद ने यहां कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है। ये कोर्स इंदिरा गांधी कृषि विवि, रायपुर के शैक्षणिक सहयोग से संचालित होंगे। प्रस्ताव के अनुसार, सत्र 2027-28 से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसमें कृषि विज्ञान में प्रमुख विषय के साथ आनुवंशिकी एवं प्लांट ब्रीडिंग जैसे विषयों में पढ़ाई का विकल्प मिलेगा। इसके अलावा व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।

स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी होगा शुरू

स्नातक पाठ्यक्रम के अलावा कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा शुरू करने का भी प्रस्ताव पारित हुआ है। इसके लिए सत्र 2028-29 से 30 सीटें रखी गई हैं। यह पाठ्यक्रम 40 क्रेडिट का होगा। इससे कृषि विज्ञान में आगे पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को एक और विकल्प मिल सकेगा।

चार साल का होगा स्नातक

प्रस्ताव में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम कृषि विज्ञान (मेजर) के लिए 40 सीटों की प्रवेश क्षमता रखी गई है। इसमें कृषि विज्ञान प्रमुख विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। पाठ्यक्रम के अलग-अलग चरणों में विद्यार्थियों को यूजी सर्टिफिकेट, यूजी डिप्लोमा, बीएससी और बीएससी ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च की उपाधि प्राप्त करने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए 44, 84, 120 और 160 क्रेडिट का प्रावधान किया गया है। पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के स्नातक पाठ्यक्रमों से जुड़े क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कृषि विज्ञान और प्लांट ब्रीडिंग में अलग-अलग सीटें

प्रस्ताव के अनुसार, कृषि विज्ञान में 60 सीटें और आनुवंशिकी वं प्लांट ब्रीडिंग में 30 सीटें निर्धारित की गई हैं। इन विषयों के लिए 24 क्रेडिट का माइनर पाठ्यक्रम और ऑनर्स सहित 32 क्रेडिट का विकल्प भी प्रस्तावित है। हालांकि, ये सीटें अलग-अलग विषयों और पाठ्यक्रमों के लिए हैं।

मधुमक्खी पालन से बीज उत्पादन तक की पढ़ाई

विद्यार्थियों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रस्ताव में मधुमक्खी पालन, बीज उत्पादन तकनीक और टैक्सोनॉमी जैसे विषयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। प्रत्येक व्यावसायिक विषय के लिए 12 क्रेडिट का प्रावधान है। इसके साथ सात कौशल संवर्धन, तीन बहुविषयक और चार ग्रीष्मकालीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक जानकारी और रोजगार से जुड़ी दक्षता देना होगा।

पहले चरण में 63 लाख रुपए खर्च का अनुमान

कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना पर कुल 1.20 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें पहले चरण में 63 लाख और दूसरे चरण में 57 लाख रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। वार्षिक आवर्ती खर्च पहले वर्ष 49.4 लाख रुपए और पूरी क्षमता से केंद्र चलने पर 88.4 लाख रुपए अनुमानित है। सभी सीटों पर प्रवेश होने की स्थिति में वार्षिक शुल्क आय 54.4 लाख रुपए आंकी गई है।

डॉ. संजय तिवारी कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के मुताबिक, सभी कोर्स इंदिरा गांधी कृषि विवि के सहयोग से संचालित होंगे। कार्यपरिषद ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय संचालन के लिए रोडमैप बना रहा है।