भिलाई

रिसाली निगम चुनाव में किसका चलेगा दांव? ताम्रध्वज साहू और ललित चंद्राकर होंगे आमने-सामने, ये मुद्दे बदलेंगे समीकरण

Risali Municipal Corporation Election: रिसाली नगर निगम चुनाव की घोषणा भले ही अभी नहीं हुई है, लेकिन सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में आमने-सामने रहे ताम्रध्वज साहू और ललित चंद्राकर एक बार फिर अलग-अलग खेमों का नेतृत्व करते नजर आ सकते हैं।
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Oct 03, 2026
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ताम्रध्वज साहू और ललित चंद्राकर होंगे आमने-सामने (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bhilai Nagar Nigam Chunav: भिलाई नगर निगम चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन रिसाली में सियासी तैयारियां शुरू हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में दुर्ग ग्रामीण सीट पर आमने-सामने रहे पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू और वर्तमान विधायक ललित चंद्राकर अब निगम चुनाव में फिर अलग-अलग खेमों का नेतृत्व करते नजर आ सकते हैं। रिसाली निगम कांग्रेस शासनकाल में भिलाई से अलग बनकर अस्तित्व में आया था। इसके गठन में ताम्रध्वज साहू की भूमिका रही, जबकि मौजूदा विधायक ललित चंद्राकर के लिए यह उनके विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर होगा।

बीएसपी की जमीन पर निर्भर विकास

निगम के पास पर्याप्त जमीन नहीं है। बीएसपी की एनओसी पर निर्भरता के कारण पार्क, सामुदायिक भवन और सडक़ चौड़ीकरण जैसे कई प्रस्ताव अटके हैं।

पानी-सीवरेज सबसे बड़ी चुनौती - रिसाली, तालपुरी, मरोदा और रूआबांधा में कम दबाव से पानी की समस्या है। कई कॉलोनियों में सीवर लाइन नहीं, जहां है वहां चोक की शिकायतें हैं।

निगम कांग्रेस का विधायक भाजपा के

रिसाली में वर्तमान में कांग्रेस की निगम सत्ता है, जबकि क्षेत्रीय विधायक भाजपा से हैं। कांग्रेस में टिकट और चुनावी रणनीति पर ताम्रध्वज साहू के प्रभाव की चर्चा है, वहीं भाजपा की ओर से ललित चंद्राकर प्रमुख राजनीतिक चेहरा होंगे। ऐसे में चुनाव में दोनों दलों की स्थानीय ताकत और निगम के पांच साल के कामकाज के साथ बुनियादी सुविधाएं भी प्रमुख मुद्दा बनेंगी।

सफाई, पट्टा और नियमितीकरण

कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं होने और खाली प्लॉटों में डंपिंग की शिकायत है। पट्टा, नियमितीकरण और मूलभूत सुविधाएं भी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।

70 वार्डों में टिकट के दावेदार सक्रिय

भिलाई नगर निगम चुनाव की आहट के साथ कांग्रेस और भाजपा में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। 70 वार्डों में पार्षद और महापौर पद के संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि टिकट वितरण में संगठन की प्रक्रिया प्रभावी रहेगी या बड़े नेताओं की पसंद को भी महत्व मिलेगा।

भाजपा में जिला और संभाग प्रभारियों की बैठकों के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि चुनाव लडऩे के लिए संगठन के सामने दावेदारी रखी जाए या प्रभावशाली नेताओं से संपर्क किया जाए। जिले में गुटीय समीकरणों की चर्चाओं के बीच कुछ नेताओं द्वारा संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने भी दावेदारों की बेचैनी बढ़ाई है।

सर्वे और फीडबैक पर भी नजर

पार्टी स्तर पर संभावित प्रत्याशियों को लेकर सर्वे, फीडबैक की प्रक्रिया की चर्चा है। महापौर पद के लिए भी दोनों दलों में कई बड़े नेता दावेदारी की तैयारी में हैं। टिकट घोषणा से पहले वार्ड स्तर पर सक्रियता व राजनीतिक संपर्क और बढऩे की संभावना है। दोनों दलों के सामने चुनौती ऐसे प्रत्याशी चुनने की है, जिसकी वार्ड के साथ संगठन में भी पकड़ हैं। अंतिम चयन में स्थानीय समीकरण, जमीनी सक्रियता, संगठनात्मक प्रक्रिया की भूमिका क्या होगी, इस पर दावेदारों की नजर है।

Updated on:
03 Oct 2026 09:43 am
Published on:
03 Oct 2026 09:43 am