भीलवाड़ा

राजस्थान के 15 जिलो में अरावली पर्वतमाला खतरे में, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे में खुलासा,कलक्टरों को कहा सत्यापन कराए

प्रदेश के 15 जिलों में अरावली पर्वतमाला खतरे में हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने राज्य के अरावली क्षेत्र के नक्शे तैयार कराए तो यह बड़ा खुलासा हुआ

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Aravali ranges in danger in bhilwara

भीलवाड़ा।

प्रदेश के 15 जिलों में अरावली पर्वतमाला खतरे में हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने राज्य के अरावली क्षेत्र के नक्शे तैयार कराए तो यह बड़ा खुलासा हुआ। इसमें राजस्थान में अरावली हिल्स के 15 जिलों के नक्शे में 3233 जगह 10,364.32 हेक्टेयर भूमि में अवैध खनन चिन्हित किया गया है। इस पर सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में चिंता जताई गई। खान विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने कलक्टरों से क्षेत्र का मौके पर सत्यापन कराने को कहा।

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अब राजस्व, खान व वन विभाग के अधिकारी मौके पर सत्यापन करने जाएंगे। पता लगाएंगे कि अरावली क्षेत्र में कितना अवैध खनन हो रहा है। यह रिपोर्ट 15 दिन में तैयार करनी होगी।पीपुल फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू के अनुसार, रेगिस्तान के विस्तार को रोक रही अरावती खतरे में है। अवैध खनन ने इसका सीना छलनी कर दिया। इससे पर्यावरण को खतरा है। पहाड़ी खत्म होने पर मरूस्थलीकरण बढ़ेगा व जैव विविधता खत्म हो जाएगी।


भीलवाड़ा में यह क्षेत्र अरावली में शामिल

भीलवाड़ा जिले के ज्ञानगढ़, चिताम्बा, फाकोलिया, आसींद, बदनौर, भीम आदि क्षेत्र अरावली पर्वतमाला की सीमा में आता है। इन क्षेत्रों में ग्रेनाइट, क्वाट्र्ज फेल्सपार, मार्बल आदि की कई खानें है। इनमें अभी भी अवैध खनन हो रहा है। प्रमुख रूप से राजस्थान के सिरोही, उदयपुर , राजसमन्द, अजमेर , जयपुर , दौसा, अलवर जिले मुख्यतया सम्मिलित है। इनकी शाखाओं एवं प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडग़ढ़ तथा भीलवाड़ा जिले भी शामिल कर लिया। सीकर और झुंझुनूं जिले की कुछ तहसीलें भी सम्मिलित की गई हैं।

पट्टाधारी की उपस्थित में देखा जाएगा मौका
सरकार के निर्देश है कि अवैध खनन जांचने मौके पर तीन विभागों के अधिकारी जाएंगे। साथ ही पट्टाधारी भी मौजूद रहेंगे। इसमें देखेंगे की लीज क्षेत्र के अलावा कितना अवैध खनन हो रहा है। इसकी रिपोर्ट सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को भेजी जाएगी।

मौका देखेंगे, तब देंगे रिपोर्ट
अरावली पर्वतमाला क्षेत्र में अवैध खनन की जांच के लिए तीन विभागों को मौके पर जाकर सत्यापन करना है। इसमें पट्टाधारी की उपस्थिति में जाकर देखेंगे कि कितना अवैध खनन हुआ है। इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी।
जिनेश हुमड़, खनि अभियंता

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Published on:
19 May 2018 02:26 pm
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