भीलवाड़ा एसीबी ने पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर माइनिंग लीज जारी कराने के 11 साल पुराने मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी कोर्ट में तत्कालीन फोरमैन और वर्तमान कनिष्ठ अभियंता मनीष पंवार समेत 8 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया है। यह मामला वर्ष 2012 में आसींद के पांडरू में माइनिंग लीज आवेदन से जुड़ा है।

भीलवाड़ा: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इकाई भीलवाड़ा प्रथम ने पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर कर माइनिंग लीज जारी कराने के ग्यारह राल साल पुराने मामले में भूजल वैज्ञानिक विभाग के कनिष्ठ अभियंता समेत आठ लोगों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। इसी मामले में खनिज विभाग के तीन कर्मियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति अभी लंबित है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की केस डायरी के अनुसार, वर्ष 2015 में ब्यूरो ने तीन प्रकरण दर्ज किए थे। इनमें एफआईआर संख्या-386 में राजस्थान उच्च न्यायालय की रोक है। जबकि एफआईआर संख्या-387 व 388 में एसीबी भीलवाई इकाई प्रथम के पुलिस उपाधीक्षक पारसमल ने 3 जून 2026 को चालान पेश किया था।
इसमें 387 में ब्यूरो ने आशा मेहता, शीला मेहता, सुमित्रा देवी खोईवाल, संजय मेहता और मनीष पंवार तथा 388 में ब्यूरो ने मनीष पंवार के साथ ही संजय मेहता, रतनलाल व मुकेश खोईवाल को प्रथम दृष्टया आरोपी माना है।
एफआईआर-387 के अनुसार, मेसर्स अंजनी माइनकेम ने वर्ष 2012 में आसींद के पांडरू में माइनिंग लीज के लिए आवेदन किया था। उस वक्त साझेदार आशा मेहता, धापूदेवी व सुमित्रा खोईवाल थे। एफआईआर-388 के अनुसार, मेसर्स भोले माइंस एंड मिनरल ने वर्ष 2012 में आसींद के पांडरू में माइनिंग लीज के लिए आवेदन किया था। फर्म के साझेदार मुकेश खोईवाल, संजय मेहता और रतनलाल थे।
आरोप है कि दोनों ही फर्म की लीज के लिए प्रस्तावित क्षेत्र का सीमांकन कर मौका रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी वर्ष 2014 में खनिज विभाग के तत्कालीन फोरमेन मनीष पंवार को सौंपी गई थी। 6 मार्च 2014 को पंवार ने यह रिपोर्ट तैयार की, लेकिन तत्कालीन पटवारी नरेशनाथ ने मौके व राजस्व रिपोर्ट में भिन्नता होने की बात कहते हुए हस्ताक्षर नहीं किए।
कुछ अंतराल के बाद पटवारी नरेशनाथ को जानकारी में आया कि उसके फर्जी हस्ताक्षर के जरिए दोनों फर्म की मौका रिपोर्ट जारी हो चुकी है। एलआईओ भी जारी होने वाली है। इसके उपरांत पटवारी ने तहसीलदार को उसके फर्जी हस्ताक्षर किए जाने को लेकर शिकायत की।
विभाग के एमई को भी अवगत कराया गया। तब तक एलओआई भी जारी हो गई। फर्जीवाड़ा उजागर होने पर ब्यूरो ने मामला दर्ज किया। एफएसएल जांच में तस्दीक हो गई कि पटवारी के हस्ताक्षर फर्जी किए गए।
ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक पारसमल ने बताया कि ने प्रकरण में मुख्य आरोपी तत्कालीन फोरमैन एवं मौजूदा भूजल वैज्ञानिक कार्यालय जोधपुर के कनिष्ठ अभियंता मनीष पंवार को 28 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। एफआईआर 387 व 388 में नामजद आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक मामलात न्यायालय में 3 जून 2026 को चालान पेश किया गया। दोनों ही प्रकरण में खनिज विभाग के कर्मचारी अजय मेहता, प्रहलाद सिंह व सोहन लाल की संलिप्ता पाने जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए संबधित विभाग को लिखा है। अभियोजन स्वीकृति लंबित है।