जिस गांव में सामूहिक कीर्तन और जुलूस निकलते हैं, आज वहां सन्नाटा है
गोवर्धनपुरा।
जिस गांव में सामूहिक कीर्तन और जुलूस निकलते हैं, आज वहां सन्नाटा है। किसी परिवार के बारे में कोई भी बात करने को तैयार नहीं है। सब एक-दूसरे से एेसे अनजान बने हैं, जैसे दूसरे गांव की बात हो रही है। हम आज करेड़ा थाना क्षेत्र के गोवर्धनपुरा गांव में पहुंचे। कहने को यह गांव छोटा ही है लेकिन सभी जातियों के लोग रहते हैं। इस गांव का एक मुद्दा अभी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। सभी में एक ही बहस है कि आखिर दलित दूल्हे को बिंदौली से नीचे क्यों उतारा गया। इस मुद्दे को लेकर गांव के कुछ बुजुर्गों से बात की तो वे अनजान बन रहे हैं।
हमने गांव में देखा कि तीन दिन पहले बिंदोली से दलित दूल्हे को नीचे उतारकर पिटाई का मामला केवल कुछ शरारती तत्वों की हरकत है। बुजुर्ग मांगीलाल ने बताया कि गांव में पहले सभी समुदायों में आपस में बढि़या प्रेम था। किसी के घर में शादी होने पर एक-दूजे के घरों में बारात ठहरती थी। खेतों में पड़ोसी होने से साथ में दुपहरी( भोजन)करते थे। अब कुछ लोगों ने केवल राजनीति करने के लिए यह माहौल खराब किया है। गांव की किराणें की दुकान पर दो-चार युवक खड़े थे। उनसे भी बात हुई तो बताया कि मामूली बात के कारण एेसा मामला हुआ है। हम सब युवा आपस में एक है और मिलझुल कर ही रहते हैं।
घर के बाहर तैनात है पुलिस जाब्ता
गांव में जिस दलित दूल्हे की पिटाई हुई है उसके परिवार के बाहर जाब्ता तैनात है। बिंदौली रोकने के बाद से पुलिस व आरएसी का जाप्ता लगा हुआ है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरूण माच्या, सीओ राम सिंह चौधरी व बरदी चंद मामले पर पूरी नजर रखे हुए हैं।
गमी वाले परिवार के सामने बिंदौली निकालने से रोका तो हुआ विवाद
गोवर्धनपुरा में जब लोगों से बात की तो विवाद ही असली कहानी सामने आई। वहां कुछ महिलाओं से पूछा तो बताया कि जिस दलित परिवार की शादी थी, उनकी बिंदौली आधे गांव में निकल गई। जहां से बिंदौली निकल रही थी उसके आगे किसी परिवार में गमी हुई थी। वहां कुछ लोगों ने बिंदौली को रोका और बताया कि आगे गमी हुई है, यही से मुड़ जाओ। इस बात को बिंदौली में शामिल कुछ युवक भी मान गए। इसके बाद कुछ युवक आए और इसे गलत बताया और बिंदौली को आगे ले जाने की बात कही। इस बात को लेकर आपस में उलझे और मारपीट हो गई।
अब पीडि़त परिवार का आरोप, नहीं डाल रहे पानी
बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम को पीडि़त परिवार ने बताया कि मंगलवार रात्रि से उनके घर में पानी खत्म हो गया। हमने गांव से टैंकर मंगवाना चाहा तो गांव से कोई भी पानी का टैंकर डालने को तैयार नहीं हुआ। दूसरी और बुधवार सुबह दलित दूल्हे की छोटी बहन गांव की चारागाह भूमि में बकरियां चराने गई तो भी गांव का एक युवक ने अभद्रता की और बकरियों को ले गया। इस पर बड़े भाई ने करेड़ा थानाधिकारी को रिपोर्ट दी है। सरपंच भैरूलाल खटीक ने बताया कि उन्होंने पीडि़त परिवार के घर पानी के टैंकर डलवाए हैं।