भोपाल

महंगाई भत्ते पर सीएम का बड़ा बयान, कर्मचारियों- अधिकारियों के एचआरए अटकने पर भी जताया दुख

DA- महंगाई भत्ते पर बड़ा बयान , एचआरए कई सालों तक अटका रहा। इस पर दुख भी जताया।

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May 18, 2025
DA stuck for 9 years in MP

DA- सीएम डॉ. मोहन यादव के लिए रविवार को कर्मचारियों ने अभिनंदन समारोह आयोजित किया। राज्य कर्मचारी संघ के तत्वावधान में आयोजित अभिनंदन समारोह और कर्मचारी सम्मेलन में सीएम ने कहा कि हमने कर्मचारियों, अधिकारियों की पीड़ा समझते हुए ट्रांसफर पॉलिसी बनाई। सरकारी नौकरी के लिए खाली पदों को भरने का अभियान चलाया। हर जिले में पुलिस बैंड के पद खत्म होते चले गए थे लेकिन हमने 55 जिलों में नए पदों को मंजूरी दी। कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने कर्मचारियों, अधिकारियों के महंगाई भत्ते पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार की वजह से प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान डीए मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आपका एचआरए अनुचित कारणों से कई सालों तक अटका रहा। इस पर दुख भी जताया।

राज्य कर्मचारी संघ द्वारा रवीन्द्र भवन में मुख्यमंत्री का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपनी सरकार की कर्मचारी हितैषी नीतियोें का जिक्र करते हुए कहा कि ये हमारे अच्छे संकल्पों का अभिनंदन है। उन्होंने 2023 के संकल्प पत्र को अक्षरश: पूरा करने का वादा दोहराया।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमने अधिकारियों, कर्मचारियों के हित में नई ट्रांसफर पॉलिसी बनाई। कर्मचारियों का ट्रांसफर तो होगा लेकिन तभी जब समय आएगा। गर्मी की छुटि्टयों का इंतजार किया। कार्यक्रम में विधायक भगवान दास सबनानी और राज्य कर्मचारी संघ तथा भारतीय मजदूर संघ के अनेक पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

कर्मचारियों, अधिकारियों के महंगाई भत्ते के संबंध में बड़ा बयान

कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने कर्मचारियों, अधिकारियों के महंगाई भत्ते के संबंध में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता एक समान करने के लिए प्रधानमंत्रीजी का एक वाक्य है- डबल इंजन की सरकार। आगे का इंजन तेज चलेगा तो हमें भी तेज भागना होगा। डबल इंजन की सरकार की वजह से प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान डीए मिल रहा है।

एचआरए अनुचित कारणों से लटकाया

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एचआरए अनुचित कारणों से लटकाया गया। नौ साल तक यूं ही लटका रहा, मैं दुखी होता था…उन्होंने कहा- वे सारे अंतर जिनके माध्यम से जबरदस्ती से अटकाना-लटकाना… ये उचित नहीं था… ये चीजें बोलने से थोड़े देना चाहिए… अपने आप ही देना चाहिए… इस मामले में मैं थोड़ा भाग्यशाली हूं… आपको ज्ञापन देने नहीं आना पड़ा… मैंने खुद ही बढ़ा दिया…

Updated on:
18 May 2025 05:33 pm
Published on:
18 May 2025 05:30 pm
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