
traffic system (Photo Source- freepik)
MP News: आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइटी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी।
वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है।
स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी।
मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।
ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे।
डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं।
मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।
Published on:
06 Jan 2026 12:45 pm
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