
भोपाल का AQI 240 से घटकर 136 पर आया (Photo Source- Patrika)
Bhopal AQI :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जनवरी की शुरुआत प्रदूषण के मोर्चे पर राहत की खबर लेकर आई है। ये बात इसलिए भी अहम है, इंसानों द्वारा प्रदूषण बढ़ाकर प्रकृति का जो नुकसान किया उसे जिम्मेदार तो ठीक करने में असमर्थ रहे तो वहीं इसे प्रकृति को ही ठीक करने का जिम्मा लेना पड़ा। आपको बता दें कि, साल के शुरुआती पांच दिनों के औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) के आंकड़ों में तेजी से सुधार हुआ है। इसका बड़ा कारण शहर में ठंड नमी और कोहरा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बदलते मौसम के चलते शहर के बिगड़े एक्यूआई स्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
बीते 01 और 02 जनवरी 2026 को जहां शहर का एक्यूआई लेवल 240-241 के आसपास दर्ज हुआ था तो वही 05 जनवरी तक घटकर 136 पर आ गया है। यानी महज चार दिनों में हवा की सेहत में करीब 100 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। वहीं, अगर अगले 2-3 दिन और मौसम का यही मिजाज रहता है तो शहर का एक्यूआई स्तर 100 अंकों के नीचे आ जाएगा, जिसे स्वस्थ्य एक्यूआई स्तर माना जाता है।
इधर, वातावरण में नमी की मात्रा 97 यानी करीब 100 प्रतिशत बनी रही। इसके कारण धूल के कण हवा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। 05 जनवरी 2026 को अलग-अलग इलाकों के आंकड़े भी इसी राहत की तस्दीक करते हैं। पर्यावरण परिसर 111, कलेक्टोरेट ऑफिस 110 और टीटी नगर 118 एक्यूआई के साथ 'मध्यम' श्रेणी में रहे।
दरअसल, ठंड के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से ड्रॉप लेट्स बनती हैं। यही बूंदें हवा में तैरते धूल के कणों और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम-10, पीएम-2.5) से चिपककर उनका वजन बढ़ा देती हैं। नतीजा-धूल हवा में टिक नहीं पाती और जमीन पर बैठ जाती है। सुबह-सुबह ओस की परत और हल्का कोहरा इसी प्रक्रिया का दृश्य संकेत है।
भोपाल के पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. विकास मिश्रा बताते हैं कि, सर्दियों में नमी बढ़ने से कुछ दिनों तक एक्यूआई में अस्थायी सुधार दिखता है, लेकिन इसे स्थायी राहत समझना गलत होगा। तापमान उलटाव (टेम्प्रेचर इन वर्जन) की स्थिति बनी तो यही प्रदूषक फिर से नीचे फंस सकते हैं। मौसम वैज्ञानिक भी मानते हैं कि, ठंडी रातें, हवा की धीमी रफ्तार और ओस नेचुरल क्लीनिंग का काम करते हैं। दिन चढ़ते ही ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियां तेज रहीं तो एक्यूआई उछल सकता है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि, यह सुधार मौसम आधारित है, न कि सिस्टम आधारित। अगर निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर सख्ती और डीजल वाहनों की निगरानी नहीं हुई, तो ओस की यह ढाल ज्यादा दिन काम नहीं आएगी।
Published on:
06 Jan 2026 11:14 am
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