भोपाल

TOD पॉलिसी लागू, वॉकिंग डिस्टेंस पर बनेंगे ‘मकान-दुकान’, भोपाल में कम होगी दूरी

Master Plan Planning Area: आर्किटेक्ट हर्ष चौरसिया, तनिष्क राठौर का कहना है, टीओडी पॉलिसी लागू की जा रही है, इसमें मकान-दुकान एक साथ बनेंगे।

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Jun 09, 2026
Master Plan Planning Area:
Master Plan Planning Area: (Photo Source - Patrika)

Master Plan Planning Area: एमपी के भोपाल शहर का विकास अब मिक्स लैंड यूज से ही होगा। मास्टर प्लान में प्लानिंग एरिया में शामिल जलस्रोत, वनक्षेत्र व इसी तरह के संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर ही प्रावधान होंगे। मास्टर प्लान पर टीएंडसीपी की ओर से शासन को दी गई रिव्यू रिपोर्ट ये स्पष्ट किया गया है।

भोपाल का मास्टर प्लान एक्सपायर हुए 21 साल हो चुके है। यहां 1016 वर्गकिमी के प्लानिंग एरिया में बार-बार संशोधन व नगर निगम व टीएंडसीपी से मंजूर लेआउट के आधार पर अलग-अलग तरह के निर्माण हो गए। ऐसे में अब शहर को आवासीय व व्यावसायिक उपयोग को एक साथ लेकर सिर्फ संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण तक सीमित किया जाएगा।

मास्टर प्लान में तय सड़कों में से 27 अब तक नहीं बन पाई है। समय के साथ इनका औचित्य भी खत्म हो शहर के अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी जैसे बड़े आवासीय क्षेत्र मिक्स लैंड यूज के तहत आवासीय व व्यावसायिक तौर पर विकसित हो गए। कोलार, चुनाभट्टी, शाहपुरा जैसे लो-डेंसिटी एरिया अब हाई डेंसिटी वाले क्षेत्र होकर मिक्स लैंड यूज वाले हो गए। पुराने शहर का 70 फीसदी एरिया में आवासीय के साथ व्यावसायिक निर्माण हो गया है। अब वहां नए प्रावधान के लिए जगह नहीं बची।

इसलिए मकान-दुकान एक साथ जरूरी

आर्किटेक्ट हर्ष चौरसिया, तनिष्क राठौर का कहना है, टीओडी पॉलिसी लागू की जा रही है, इसमें मकान-दुकान एक साथ बनेंगे। कार्यालय-दुकान से घर की दूरी वॉकिंग डिस्टेंस पर होना जरूरी है। मिक्स लैंड यूज से मकान-दुकान एक साथ हो जाएंगे।

यह दिक्कत भी

पूर्व टाउन प्लानर डीपी शर्मा का कहना है कि दस लैंड यूज इसलिए तय किए गए, ताकि हर क्षेत्र अलग तरह से विकसित हो। मिक्स लैंड यूज आज की मांग है, लेकिन इसमें हर जगह प्रावधान करने से संकरी गलियों में जाम और पार्किंग की दिक्कत के साथ अशांति की स्थिति बनेगी। इसमें देखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, एक बार तय लैंड यूज नहीं बदला जाए

मनमर्जी से लैंड यूज बदलवाकर निर्माण व उपयोग करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश ने ब्रेक लगाया है। एक बार जिस लैंड यूज का उपयोग किया, उसे फिर बदलना मुश्किल होगा। ऐसे में मिक्स लैंड यूज एक बीच का रास्ता बनाने की कोशिश है।

संरक्षण का प्लान ही बेहतर

आर्किटेक्ट प्लानर राजेश चौरसिया के अनुसार केरवा-कलियासोत वनक्षेत्र में नई सड़कें बनने से गतिविधियां बढ़ गई। नीलबड़ रातीबड़ से लेकर कलखेड़ा, बरखेड़ा नाथू और भौंरी जैसे कैंचमेंट वाले क्षेत्रों में निर्माण हो गए।

Published on:
09 Jun 2026 12:26 pm