
CM Mohan Yadav Change Two Child Policy: मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश में लागू एक 25 साल पुराने नियम को हटाने का फैसला लिया है। अब मप्र में दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को भी सरकारी नौकरी मिलेगी और जिन शासकीय सेवकों के दो से अधिक बच्चे हैं, उनकी भी नौकरी नहीं जाएंगी। 25 साल पुराने नियम में प्रावधान थे कि दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं यदि किसी शासकीय सेवक ने अधिक बच्चे पैदा किए हैं और शिकायत मिलती है तो उनकी नौकरी भी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को उक्त पुराने नियम को खत्म करने के निर्देश अफसरों को दे दिए थे।
मोहन सरकार समय के साथ बदलते स्वरूप में मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम-1965 नियमों में बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने संशोधित ड्रागट भी जारी कर दिया है और लोगों से सुझाव मांगे हैं। बता दें कि उक्त ड्राफ्ट में दो बच्चों वाला नियम यथावत रखने के प्रावधान थे। सूत्रों के मुताबिक जब यह बात मुख्यमंत्री के संज्ञान में आई तो उन्होंने उक्त नियम को हटाने के निर्देश दे दिए। सूत्रों की मानें तो मोहन सरकार के पुराने नियम को खत्म करने से इसका फायदा उन सरकारी सेवकों को भी मिलेगा, जिनके तीन बच्चे हैं। हालांकि ड्राफ्ट में दावे आपत्ति के बाद नए संशोधित नियम की वस्तु स्थिति स्पष्ट होगी। बहरहाल, इससे पूर्व में प्रभावित और दायरे में आने वालों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कई मौके पर कह चुके हैं कि बच्चे तीन भी अच्छे हैं। असल में वे बार-बार परिवार संतुलन की बात पर जोर देते रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई दंपती एक बच्चे तक सिमट गए हैं। जिससे परिवार का संतुलन बिगड़ने का खतरा है। माना जा रहा है कि सीएम ने संघ प्रमुख की सलाह पर उक्त निर्णय लिया है।
यहां ये भी बता दें कि 2001 में दिग्विजय सिंह की सरकार के वक्त मप्र सिविल सेवा नियम-1961 में यह प्रावधान किया था कि 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले अभ्यर्थी शासकीय सेवा के लिए अपात्र माने जाएंगे। साथ मप्र शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को कदाचार की श्रेणी में शामिल भी कर लिया था।