
MP News :मध्य प्रदेश से राज्यसभा में तीसरा प्रत्याशी उतारकर भाजपा ने कांग्रेस को 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मिनी अग्नि परीक्षा में झोंक दिया है। लेकिन, भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी इससे अछूता नहीं है। अगर जीत मिली तो दिल्ली में सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कद बढ़ेगा और अगर हारे तो सवाल भी उठना तय है। उधर, कांग्रेस खेमे में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए अगले 10 दिन किसी चुनौती से कम नहीं होने वाले। राहुल गांधी की टीम दोनों के नेतृत्व को परखेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के लिए ये जीत कई मायने में खास तो होगी, लेकिन हार पर उतना गम भी नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के लोग कांग्रेस के खिलाफ किए गए एक प्रयोग की तरह ले सकते हैं। जबकि, बहुमत होते हुए भी अगर नटराजन सफल नहीं हुईं तो ये कांग्रेस के लिए एक बड़ा सदमा साबित होगा।
-राजनीतिक मामलों के जानकार राजकुमार सिन्हा कहते हैं कि, तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा के पास बहुमत नहीं है। जीत मिली तो राज्यसभा में पार्टी की ताकत बढ़ेगी।
-राजनीतिक तौर पर अगले ढाई साल कांग्रेस को कई मौकों पर हतोत्साहित करने के अवसर मिलेंगे।
-जनता को भी यह बताने के प्रयास होंगे कि आपके वोट पर जीतने वाले कांग्रेस भी भाजपा की रीति-नीति से कहीं न कहीं प्रभावित है और भाजपा को ही सहयोग कर रहे है।
1-जनता के मन में सवाल खड़े होने तय है कि आखिर बहुमत नहीं था, तब भी भाजपा ने तीसरी सीट कैसे जीत ली, इसके लिए क्या किया होगा?
2-कांग्रेस विक्टिम कार्ड खेलेगी। बताएगी कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले दल ने धोखे से जीत हासिल की, इसके लिए जोड़-तोड़ किया।
-राजनीतिक मामलों के जानकार एवं पूर्व विधायक दरबू सिंह कहते हैं कि कांग्रेस जीतती है तो यह अपने आप में भाजपा को बड़ा जवाब होगा। 20 साल से विपक्ष में रहने के बावजूद मजबूती का प्रदर्शन होगा।
-कई मंचों पर गिनाया जाएगा कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जाने वाली भाजपा का बुरा हश्र हुआ।
-प्रदेश नेतृत्व पर राहुल गांधी का विश्वास बढ़ेगा, एकजुटता से आगे निकाय चुनावों में मदद मिलेगी।
1-बहुमत होते हुए भी हारे तो जनता के मन से उतरेंगे, अगले निकाय चुनाव व विधानसभा चुनाव में जतना का विश्वास जीतने में दिक्कत आ सकती है।
2-भाजपा जनता के बीच जाकर बताएगी कि कांग्रेसी एकजुट नहीं है, आपस में ही खींचतान जारी है। ऐसे में यदि ये सत्ता में आए तो प्रदेश का नुकसान करेंगे।