
Tarun Chugh Rajya Sabha MP BJP Strategy- क्या भाजपा ने अभी से पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू कर दी है? अमृतसर के तरुण चुघ को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। विश्लेषकों का मानना है कि तरुण चुघ के जरिए भाजपा दूर की रणनीति लेकर चल रही है। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। आइए जानते हैं तरुण चुघ क्यों मध्यप्रदेश के रास्ते राज्यसभा में भेजे जा रहे हैं…? क्या है भाजपा और कांग्रेस की आगे की रणनीति…?
भोपाल के पत्रकार हरिनारायण यादव जो इस मामले को देखते हैं, उनका भी मानना है कि राज्यसभा में भेजे जाने वालों के लिए मध्यप्रदेश एक सेफ स्टेट माना जाता है। क्योंकि आलाकमान के निर्देश पर जब किसी बड़े नेता को राज्यसभा में भेजा जाता है तो मध्यप्रदेश में इसका विरोध नहीं होता है। हालांकि अन्य लोग भी राज्यसभा में जाने की इच्छा रखते हैं, लेकिन खुलकर कभी विरोध कोई नहीं करता। यहां भाजपा की सरकार है और विधायक भी ज्यादा है, इसलिए चुनाव में संघर्ष की नौबत नहीं आती है। इसके साथ ही तरुण चुघ के मध्यप्रदेश की राजनीति में दखल बढ़ेगा और सत्ता और संगठन में इसे सामंजस्य के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बीजेपी ने पंजाब के जातीय समिकरणों को भी साधने का प्रयास किया है। भाजपा हिन्दू नेतृत्व को आगे बढ़ाते हुए तरुण चुघ को आगे ला रही है। अकाली दल से अलग होने के बाद बीजेपी लगातार ग्रामीण इलाकों में, जाट सिख समुदाय, दलित वर्ग और नए सामाजिक समूहों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। तरुण चुघ भाजपा की उसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। ऐसे उम्मीदवारों को भाजपा आगे बढ़ा रही है, जिनकी छवि संगठन के प्रति निष्ठा और लंबे समय से योगदान देने वाली रही है।
पंजाब चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के जरिए भाजपा ने पंजाब चुनाव की दूरगामी रणनीति तैयार की है। क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में 117 सीटों वाले सदन में भाजपा को केवल 2 ही सीट मिल सकी थी। शनिवार को पंजाब के अमृतसर के तरुण चुघ ने भोपाल पहुंचकर राज्यसभा का नामांकन भर दिया। वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और मोदी-शाह के करीबी लोगों में गिनती होती है और भाजपा ने इन्हें मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव का उम्मीदवार बनवाया है। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। क्या तरुण चुघ के जरिए भाजपा ने पंजाब चुनाव की 'गुपचुप' तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र में तरुण चुघ को अहम जिम्मेदारी देकर पंजाब में भाजपा को मजबूत करने की प्लानिंग है।
AAP: 92
कांग्रेस: 18
शिअद: 3
भाजपा: 2
बसपा: 1
निर्दलीय: 1
पंजाब में भाजपा की स्थिति बेहद खराब थी। कुछ समय पहले ही सरदार केवल सिंह ढिल्लों को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। हाल ही में निकाय चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले आए। इससे भजपा में नई ऊर्जा मिलती हुई दिखाई दी और उत्साह आ गया। आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 20 नगर पंचायतों के कुल 1977 वार्डों में हुए चुनावों में भाजपा ने पिछले चुनावों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। भाजपा ने 172 वार्डों में जीत दर्ज की है। भाजपा का यह प्रदर्शन राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी अब इसी बढ़त को आगे ले जाने की तैयारी में है। मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए गए तरुण चुघ ने सोशल मीडिया पर आंकड़ा पेश किया है।
मध्यप्रदेश से राज्यसभा में जाने वाले 11 सांसद हैं। इनमें से कुछ अन्य प्रदेशों के हैं। इनके अलावा अन्य प्रदेशों के नेता जो केंद्र में मंत्री भी बनाए गए। जॉर्ज कुरियन, एल मुरुगन, धर्मेद्र प्रधान, एमजे अकबर आदि प्रमुख नेताओं में हैं।
कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की अभी से तैयारी तेज कर दी है। भाजपा ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया। इसके बाद कांग्रेस ने भी राज्य के संगठन में फेरबदल की योजना तैयार की है। यही कारण है कि पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी और को सौंपी जा सकती है। विजय इंद्र सिंगला और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं। इस बार कांग्रेस ने हिन्दू कार्ड खेलने की तैयारी की है। वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग हैं।
गौरतलब है कि 2022 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार है। विधानसभा की कुल 117 सीटों में से आम आदमी पार्टी के विधायक 92 हैं। कांग्रेस के 18 हैं। शिरोमणि अकाली दल के 3, भाजपा के 2, बसपा का 1 और निर्दलीय 1 हैं।
Who is Tarun Chugh?- 3 मई 1973 को अमृतसर के मध्यमवर्गीय परिवार के बनारसी दास चुघ के घर जन्मे थे। इनकी शुरुआती शिक्षा अमृतसर में हुई। 9 साल की उम्र में ही वे आरएसएस से जुड़ गए थे और 1989 तक उन्होंने घट नायक और कार्यवाह की जिम्मेदारी निभाईं। बाद में डीएवी कॉलेज अमृतसर से एमबीए (एचआर) की डिग्री ली। इसी दौरान वे छात्र राजनीति में जुड़ गए और जिला सचिव और राज्य की कार्यकारिणी के सदस्य बनाए गए। 1992 में बाबरी ढांचे गिरने के बाद तरुण चुघ मध्यप्रदेश की उमा भारती के संपर्क में आ गए थे। 1993 में भाजयुमो अमृतसर के जिला अध्यक्ष बनाए गए थे। यही पहला मौका था जब संगठन के अहम पद से उनकी शुरुआत हो गई। इसके बाद उन्हें भाजपा जिला अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी मिली थी।