
(पत्रिका ब्यूरो ,भुवनेश्वर): सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र व आंध्रप्रदेश सरकार को पोलावरम पर पर्यावरणीय क्लियरेंस देने के मामले में नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ओडिशा सरकार की याचिका में इस बाबत पूछा है कि निर्माण से पूर्व पर्यावरण क्लियरेंस लिया है क्या? यह सुनवाई न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर व दीपक गुप्ता की बेंच में हुई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व आंध्रसरकार को तीन हफ्ते का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में जवाबदावा दाखिल करेने को कहा है।
परियोजना से ओडिशा को होगा नुकसान
एडवोकेट श्रवणकुमार ने बताया कि चार हफ्ते बाद फिर सुनवाई की जाएगी। तेलंगाना और ओडिशा सरकार ने पोलावरम पर आपत्ति उठाई है। एक मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी चल रहा है। आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर बन रही इस परियोजना से आंध्र के कुछ इलाके, तेलंगाना में खम्मम, छत्तीसगढ़ में सुकुमा समेत कुछ अन्य क्षेत्र डूबेंगे। ज्यादा असर ओडिशा पर पड़ेगा। जबकि इससे ओडिशा को इससे एक भी यूनिट बिजली तक नहीं मिलेगी और न ही एक इंच जमीन।
पानी में डूब जाएंगें ओडिशा के कई गांव
मलकानगिरि की मोटू तहसील तो पूरी तरह से डूब जाएगी। आठ हजार से आबादी पूरी तरह से विस्थापित होगी। इसमें 6 हजार आदिवासी हैं। ओडिशा में पोलावरम को लेकर जबर्दस्त विरोध है । बीजद प्रवक्ता सुलोचना दास कहती हैं कि परियोजना के लिए हुए अंतर्राज्यीय समझौते के मुताबिक इसके निर्माण से राज्य को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अब उसके पालन में क्यों दिक्कत हो रही है? मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे। सरकार की ओर से याचिका भी दायर की गई ।