
Bijapur Gangrape Case: बीजापुर जिले में नाबालिग बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के विरोध में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सोमवार को जिला मुख्यालय में जिला कांग्रेस कमेटी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गृहमंत्री विजय शर्मा का पुतला दहन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे और घटना को लेकर कड़ा आक्रोश जताया गया।
बीजापुर में हुई इस संवेदनशील और गंभीर घटना को लेकर कांग्रेस ने जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान गृहमंत्री का पुतला दहन भी किया गया, जो सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार बदलने के बाद से महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, खासकर बस्तर संभाग में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विधायक ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक, नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे जघन्य अपराध यह दर्शाते हैं कि सरकार इन्हें रोकने में विफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने आना स्थिति को और गंभीर बनाता है।
भैरमगढ़ क्षेत्र में हुई घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस नेताओं ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पार्टी आने वाले समय में और उग्र आंदोलन करेगी।
इस विरोध प्रदर्शन और प्रेस वार्ता में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष लालू राठौर, नीना रावतिया उद्दे, सोनू पोटाम, बेनहुर रावतिया, राजेश जैन, प्रवीण डोंगरे, पुरुषोत्तम खत्री, कविता यादव, राजीव सिंह, कल्याण सिंह, बाबूलाल राठी, एमैया जंगम, जग्गी सेन सहित कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यह घटना न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बनती जा रही है। एक ओर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और पीड़िता को कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है।