
झीरम पर सियासत गरमाई (Photo Source- Patrika Create)
Jhiram Case Verdict: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी मामले में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर सियासत गरमा गई है। बीजापुर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने फैसले का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही झीरम हमले से जुड़े कई सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि हमले में जान गंवाने वाले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवारों को पूरा न्याय तभी मिलेगा, जब घटना के पीछे की कथित बड़ी साजिश का सच सामने आएगा।
विक्रम मंडावी ने कहा कि झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 32 लोगों की जान गई थी। अदालत का फैसला अपनी जगह महत्वपूर्ण है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इस पूरे मामले का एक बड़ा पहलू अभी भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना था कि घटना के पीछे अगर कोई राजनीतिक षड्यंत्र था या नक्सली नेतृत्व की कोई बड़ी भूमिका थी, तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि जांच इस दिशा में उस स्तर तक नहीं पहुंच सकी, जहां से कथित साजिश की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
मंडावी ने जांच के दौरान सामने आए नक्सली नेताओं के नामों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती जांच और एफआईआर में कुछ बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, लेकिन बाद की कार्रवाई और चार्जशीट में कुछ नाम दिखाई नहीं दिए। उन्होंने गणपति और रमन्ना जैसे नक्सली नेताओं का जिक्र करते हुए सवाल किया कि यदि इन नेताओं की भूमिका को लेकर शुरुआती स्तर पर जांच हुई थी, तो बाद में उनकी भूमिका स्पष्ट क्यों नहीं की गई। कांग्रेस का कहना है कि झीरम जैसे बड़े हमले की जांच केवल घटना को अंजाम देने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे की पूरी साजिश की भी पड़ताल होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में विक्रम मंडावी ने उन नक्सलियों को लेकर भी सवाल उठाया, जो बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने चैतू, रूपेश, निर्मला, भूपति और सुजाता जैसे नामों का उल्लेख करते हुए पूछा कि यदि ये लोग पहले नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहे हैं, तो झीरम हमले के संबंध में इनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई। मंडावी ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पास संगठन की गतिविधियों और नेतृत्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। ऐसे में झीरम हमले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए उनसे पूछताछ किए जाने की जरूरत थी।
विधायक ने झीरम हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव और परिवर्तन यात्रा के रूट को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यात्रा का रूट बदलने का फैसला किस स्तर पर लिया गया था और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के पीछे क्या कारण थे। मंडावी ने कहा कि इन सवालों के जवाब सामने आने जरूरी हैं, क्योंकि घटना से पहले की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था को समझे बिना पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकती।
कांग्रेस विधायक ने राज्य में हुई SIT जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि झीरम मामले में राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की जांच जिस तरीके से आगे बढ़नी चाहिए थी, वह अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की सरकारें झीरम मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने को लेकर गंभीर नहीं रही हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
विक्रम मंडावी ने कहा कि झीरम घाटी हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत है। कांग्रेस का कहना है कि घटना को लेकर जो सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं, उनका जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि झीरम हमले में शहीद हुए नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के परिवारों के लिए न्याय का मतलब केवल दोषियों को सजा मिलना नहीं है, बल्कि घटना के पीछे की कथित साजिश और इसमें शामिल लोगों की भूमिका भी सामने आना है। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने एक बार फिर झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की पड़ताल की मांग उठाई। इसके साथ ही नक्सली नेतृत्व की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और यात्रा के रूट से जुड़े सवालों के जवाब सामने लाने की मांग की गई।
Updated on:
06 Sept 2026 05:49 pm
Published on:
06 Sept 2026 05:49 pm
