Chandrashekhar Azad : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद 2 जून से 'सत्ता परिवर्तन' यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। तमिलनाडु के 'विजय' मॉडल से उत्साहित चंद्रशेखर ने यूपी की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का मन बनाया है, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश को अगले साल विधानसभा चुनाव से गुजरना है। ऐसे में सभी दलों ने अपनी रणनीति क तैयारी तेज कर दी है। इस चुनाव में दलित वोटों पर सबकी नजर रहेगी। मायावती की बसपा के कमजोर पड़ने के बाद दलित वोट काफी हद तक भाजपा की तरफ शिफ्ट हुआ है। अब भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद की कोशिश इस वोट बैंक का रुख अपनी तरफ मोड़ने की होगी।
इसी के मद्देनजर आज़ाद 2 जून से पूरे उत्तर प्रदेश में 'सत्ता परिवर्तन' यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। लोकसभा में नगीना सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले चंद्रशेखर, चुनाव से पहले, यूपी के सभी 75 ज़िलों का दौरा करने की योजना बना रहे हैं।
चंद्रशेखर की यात्रा का उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ ही 'आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम)' या ASP(KR) को एक राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करना है। चंद्रशेखर दलित समाज को अपना मुख्य वोटर मानते हैं, जिसकी राज्य की आबादी में 21% हिस्सेदारी है। मतदाताओं के इस वर्ग ने पारंपरिक रूप से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन किया है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह जनाधार धीरे-धीरे कम होता गया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने मजबूत 'सोशल इंजीनियरिंग मॉडल' की बदौलत कभी ताकतवर रही BSP का वोट शेयर 2022 के विधानसभा चुनावों में घटकर महज़ 13 प्रतिशत रह गया। पिछले चुनावों के मुकाबले इसमें 9 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जिसका नतीजा यह हुआ कि 403 सदस्यों वाले सदन में उसे महज एक सीट मिली। ASP सहित दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी इस अहम वोट बैंक को हासिल करने की होड़ में लगी हुई हैं।
चंद्रशेखर, तमिलनाडु में जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) की शानदार जीत से उत्साहित और प्रेरित हैं। उनका कहना है कि अगर सिर्फ़ दो साल पहले बनी कोई पार्टी वहां सत्ता में आ सकती है, तो आज़ाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं कर सकती? हमें बस अपनी पूरी ताकत और मेहनत लगानी होगी। एक दिन, राज्य की सत्ता हमारी होगी। चंद्रशेखर ने संकेत दिया है कि विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी अपने दम पर लड़ेगी, वह किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि जिस तरह लोकसभा चुनाव अकेले लड़कर उन्होंने नगीना सीट पर जीत हासिल की, वैसे ही विधानसभा चुनाव भी वह अकेले लड़ेंगे। नगीना की तरह पूरे राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं। जो भी एक मज़बूत विकल्प के तौर पर सामने आएगा, उसे जनता का समर्थन मिलेगा। यह यात्रा हमें जमीनी स्तर पर मज़बूत करेगी।
चंद्रशेखर ने अपनी 'सत्ता परिवर्तन' के रूट को लेकर अभी अधिक जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन बताया आज रहा है कि यात्रा ज़िग-ज़ैग पैटर्न में हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक हफ्ते चंद्रशेखर पूर्वांचल के मऊ से यात्रा शुरू कर सकते हैं और अगले हफ्ते बुंदेलखंड के किसी इलाके में जा सकते हैं। बता दें कि आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) की स्थापना मार्च 2022 में हुई थी और अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में इसकी इकाइयां हैं। पार्टी के 30 से अधिक जिलों में कार्यालय हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद, पार्टी अपने गढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बाहर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने में कामयाब रही है।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) ने पहली बार 2022 के UP चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन सभी सीटों पर जमानत ज़ब्त हो गई। चंद्रशेखर ने खुद गोरखपुर सदर सीट से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उन्हें सिर्फ़ 7,640 वोट मिले और उनकी भी जमानत जब्त हो गई। इसके बाद उन्होंने नगीना में सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर दिया। उनका असली मुकाबला यहां BJP उम्मीदवार ओम कुमार से था। माना जा रहा था कि मोदी लहर के बीच बीजेपी आसानी से सीट अपने नाम कर लेगी, लेकिन नतीजे चौंकाने वाले रहे। चंद्रशेखर ने नगीना सीट 1.51 लाख से भी अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत ली। इस शानदार जीत से उत्साहित चंद्रशेखर 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं।
यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार ने काफी काम किया है, ऐसे में एक बार फिर उनके सत्ता में लौटने की संभावना काफी ज्यादा है। हालांकि, मतदाता आखिरी वक्त पर किसका हाथ छोड़ दे और किसका थाम ले नहीं कहा जा सकता, ऐसे में चंद्रशेखर की 'सत्ता परिवर्तन' यात्रा भाजपा की टेंशन जरूर बढ़ा सकती है।