बीकानेर

मुरैना ट्रेन हादसे में बीकानेर की महिला की मौत, 15 साल पहले पति का निधन; अब 4 बेटियों के सिर से उठा मां का साया

Morena Train Accident: घेसूरा गांव की रहने वाली बीरमा देवी पत्नी स्वर्गीय गिरधारी गुसाईं की मौत की खबर से पूरे क्षेत्र को शोक की लहर है। घर से बागेश्वर धाम यात्रा पर गई बीरमा देवी अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगी।
2 min read
• •
Updated: 15 Jun 2026, 8:38 AM IST
Morena Train Accident
मुरैना ट्रेन हादसे में बीकानेर की बीरमा देवी की मौत। फोटो: पत्रिका

बीकानेर। घेसूरा गांव की रहने वाली बीरमा देवी पत्नी स्वर्गीय गिरधारी गुसाईं की मौत की खबर से पूरे क्षेत्र को शोक की लहर है। घर से बागेश्वर धाम यात्रा पर गई बीरमा देवी अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगी। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में रविवार शाम हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे में बीरमा देवी की मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया और परिजनों के साथ ग्रामीण भी गहरे सदमे में आ गए। बीरमा देवी श्रीगंगानगर के रघुनाथपुरा स्थित अपने पीहर से परिजनों और अन्य महिलाओं के साथ बागेश्वर धाम दर्शन के लिए गई थी। आज वापसी होनी थी, लेकिन उसकी मौत की खबर ने पूरे गांव को शोक में ला दिया है।

करीब 15 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में बीरमा देवी के पति गिरधारी का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह बीरमा देवी के कंधों पर आ गई। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अकेले दम पर परिवार को संभाला। बीरमा देवी के कोई पुत्र नहीं था। उनकी चार बेटियां हैं, जिनका उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पालन-पोषण किया। बेटियों की शिक्षा, परवरिश और विवाह की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं निभाई। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने मां और पिता दोनों की भूमिका निभाकर बेटियों को बेहतर जीवन देने का प्रयास किया।

मां की मौत की खबर से टूट गईं बेटियां

अब चारों बेटियां अपने-अपने ससुराल में हैं। हादसे की सूचना मिलने के बाद बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। बीरमा देवी के देवर रहिस गिरी ने बताया कि बेटियां बार-बार यही कह रही हैं कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं। जिसने जीवनभर उनका सहारा बनकर संघर्ष किया, वही मां अचानक उन्हें छोड़कर चली गई।

गांव में पसरा सन्नाटा

घेसूरा गांव में बीरमा देवी के निधन की खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। उनके घर पर ग्रामीणों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। घर के बाहर खड़े लोगों की आंखें नम हैं और हर जुबान पर सिर्फ एक ही बात है … एक संघर्षशील और ममतामयी महिला का यूं अचानक चले जाना पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।

ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि

ग्रामीणों ने बीरमा देवी को मेहनती, सरल और साहसी महिला बताते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। उनका जीवन संघर्ष, आत्मबल और मातृत्व की मिसाल था। गांव के लोग उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना कर रहे हैं।

Updated on:
15 Jun 2026, 8:38 AM IST
Published on: