बिलासपुर

छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में प्रमोशन को लेकर विवाद, हाईकोर्ट ने 8 अधिकारियों को भेजा नोटिस

Police Promotion Dispute: छत्तीसगढ़ पुलिस में वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को SP और कमांडेंट का प्रभार देने के मामले में हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है।
3 min read
Police Promotion Controversy
पुलिस विभाग में प्रमोशन विवाद पहुंचा हाई कोर्ट (photo source- Patrika)

Police Promotion Controversy: छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक (SP) और कमांडेंट जैसे उच्च पदों का प्रभार दिए जाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को जारी विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार के साथ-साथ प्रभार पाने वाले आठ कनिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।

Richa Mishra Petition: पढ़िए क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता ऋचा मिश्रा वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य शासन के 20 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक और कमांडेंट जैसे उच्च पदों का प्रभार सौंपा गया है। याचिका में बताया गया है कि संबंधित वरिष्ठता और प्रावीण्य सूची में ऋचा मिश्रा का नाम 35वें क्रम पर है। इसके बावजूद उन्हें उच्च पद का प्रभार देने के बजाय उप-कमांडेंट के पद पर पदस्थ किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देना वरिष्ठता के नियमों के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने शासन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

2014 के शासन परिपत्र का दिया हवाला

ऋचा मिश्रा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट में राज्य शासन के 14 जुलाई 2014 के परिपत्र का हवाला दिया। अधिवक्ता के मुताबिक इस परिपत्र में स्पष्ट व्यवस्था है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को दरकिनार कर उससे कनिष्ठ अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं सौंपा जा सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बावजूद ऋचा मिश्रा को अपेक्षाकृत कनिष्ठ पद पर भेजा गया, जबकि उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को SP और कमांडेंट के पदों का प्रभार दिया गया है। अधिवक्ता ने इसे राज्य शासन की अपनी नीति के विपरीत और मनमाना निर्णय बताया। उन्होंने कोर्ट से विवादित आदेश पर रोक लगाने की मांग की।

हाईकोर्ट ने माना- प्रथम दृष्टया मामला बनता है

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य शासन के 14 जुलाई 2014 के परिपत्र और कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन किया। उपलब्ध सामग्री के आधार पर सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ पाया। इसके बाद कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को जारी विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर याचिकाकर्ता के संबंध में अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट के इस आदेश के बाद वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद का प्रभार देने को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया है।

राज्य सरकार और 8 अधिकारियों को नोटिस

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार के साथ उन आठ कनिष्ठ अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है, जिन्हें विवादित आदेश के तहत उच्च पदों का प्रभार दिया गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से मामले में अपना जवाब पेश करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में सरकार और संबंधित अधिकारी अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखेंगे।

Police Seniority Case: सरकार ने जवाब के लिए मांगा तीन सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने जवाब पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार की इस मांग को स्वीकार कर लिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

वरिष्ठता और प्रभार को लेकर उठे सवाल

इस मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में वरिष्ठता के आधार पर उच्च पदों का प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि जब शासन के पुराने परिपत्र में वरिष्ठ अधिकारी को दरकिनार कर कनिष्ठ को उच्च पद का प्रभार देने पर स्पष्ट व्यवस्था है, तो 20 जुलाई के आदेश में इसका पालन क्यों नहीं किया गया। फिलहाल हाईकोर्ट ने विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई है। यह रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी। अंतिम निर्णय कोर्ट में आगे की सुनवाई और सभी पक्षों के जवाब के बाद होगा।

Updated on:
09 Aug 2026 03:29 pm
Published on:
09 Aug 2026 03:29 pm
Also Read
View All
रिटायरमेंट के बाद 14 साल बाद 4.88 लाख की वसूली का आदेश, हाईकोर्ट ने वन विभाग का फैसला किया रद्द

अब AI से जांची जाएंगी यूनिवर्सिटी की उत्तर पुस्तिकाएं, बिलासपुर में नई व्यवस्था शुरू, जानें पूरी प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में RTE फंड का मामला गरमाया, ड्रेस-किताब के नाम पर 1.84 करोड़ का बड़ा खेल

हिमालय से आया स्फटिक, जयपुर में तैयार हुआ शिवलिंग… बिलासपुर में विराजे हैं स्फटिकेश्वर महादेव, जानें इसकी खासियत

चालान में देरी और ई-साक्ष्य में लापरवाही पड़ी भारी! बिलासपुर के 18 थाना प्रभारियों को मिली ये सजा, एसएसपी ने दिए सख्त निर्देश