बिलासपुर

Coal Levy Scam: रानू साहू के रिश्तेदारों को बड़ा झटका, HC ने अटैच संपत्तियों पर लगाई मुहर, सभी याचिकाएं खारिज

Coal Levy Scam: कोर्ट ने रानू साहू के रिश्तेदारों की अटैच संपत्तियों पर मुहर लगाते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
2 min read
Bilaspur High Court
Bilaspur High Court: 'बहन का बदला' लेने निकले भाई(photo-patrika)

Coal Levy Scam: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कोरबा की पूर्व व निलंबित कलेक्टर रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस कार्रवाई के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

मामला कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने रानू साहू के रिश्तेदार तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच की थीं। इन सभी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी थी और अटैच संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की थी।

सीधे सबूत जरूरी नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सीधे साक्ष्य मिलना अक्सर कठिन होता है, क्योंकि लेन-देन जटिल और परोक्ष तरीके से किए जाते हैं। फाइनेंशियल एनालिसिस, संपत्ति खरीद की टाइमलाइन और वैध आय के अभाव के आधार पर भी यह माना जा सकता है कि संपत्ति और अपराध से हुई कमाई के बीच प्रथमदृष्ट्या संबंध है। इस पर हाईकोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को सही ठहराते हुए रानू साहू के रिश्तेदारों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ताओं के तर्क खारिज

याचिकाओं में कहा गया था कि संबंधित संपत्तियां रानू साहू के कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थीं, इसलिए उन्हें अटैच करना गलत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है और अपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा अपील खारिज करना भी अनुचित है। कोर्ट ने इन सभी तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत स्वत: सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत जुर्म से हुई कमाई की परिभाषा केवल अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी समतुल्य कीमत की संपत्ति भी इसमें शामिल होती है।

इससे संबंधित खबरें पढ़े

पिकअप से पिता को कुचलने वाले बेटे को राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा घटाई, जानें पूरा मामला- बिलासपुर हाईकोर्ट ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हुए एक चर्चित हत्या मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी बेटे महात्मा यादव को दी गई उम्रकैद की सजा को बदलते हुए धारा 302 के बजाय धारा 304 भाग-1 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर दिया है… पूरी खबर पढ़े

अमित जोगी ने वर्तमान HC जज से की 3 बड़ी मांगें, बोले- कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़कर नहीं छिपेगा सच- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने 17 लोगों की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे के बाद कई परिवारों का सहारा छिन गया। अपनों की तलाश में परिजन रात करीब 3 बजे तक सक्ती और रायगढ़ के पांच अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काटते रहे… पूरी खबर पढ़े

Published on:
24 Apr 2026 02:04 pm