बिलासपुर

मृतक के परिजनों को अब तक नहीं मिला मुआवजा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंजाब रोडवेज को दिया झटका

Motor Accident Compensation Case: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजे के मामले में 389 दिन की देरी से अपील करने पर पंजाब रोडवेज की बस प्रबंधन कंपनी पर 38 हजार रुपये का खर्च लगाया है।
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Road Accident Compensation
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंजाब रोडवेज के सामने रखी शर्त (Photo Source- Patrika File Photo)

Road Accident Compensation: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के परिजनों को दिए गए मुआवजे के मामले में पंजाब रोडवेज की बस प्रबंधन कंपनी को राहत तो दी, लेकिन अपील दायर करने में हुई देरी के लिए 38 हजार रुपये का खर्च जमा करने का निर्देश दिया है। कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के मुआवजा आदेश को चुनौती देने के लिए 389 दिन की देरी से अपील दायर की थी। न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की पीठ ने देरी माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। हालांकि, कोर्ट ने अंतरिम राहत के लिए मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त भी रखी है।

Chhattisgarh High Court: मृतक के परिजनों को मिला था एक करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा

यह मामला 14 अक्टूबर 2019 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिजनों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में याचिका दायर की थी। अधिकरण ने 22 फरवरी 2025 को मामले में फैसला सुनाते हुए मृतक के परिजनों को एक करोड़ नौ हजार 160 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस राशि पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देय था।

मुआवजा आदेश के खिलाफ पंजाब रोडवेज की बस के मालिक की ओर से हाई कोर्ट में अपील दायर की गई। हालांकि, अपील दाखिल करने में निर्धारित समय से 389 दिन की देरी हो गई। कंपनी ने इस देरी को माफ करने की मांग करते हुए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया।

मुआवजा नहीं मिलने पर कोर्ट ने जताया ध्यान

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अधिकरण के आदेश के बावजूद दावेदारों को अब तक मुआवजे की कोई राशि जमा नहीं की गई थी। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कर दिया, ताकि मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर की जा सके।हालांकि, देरी माफ करने के साथ कंपनी पर 38 हजार रुपये का खर्च भी लगाया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि 30 दिन के भीतर किसी एक दावेदार को चेक के माध्यम से अधिकरण के समक्ष दी जाए।

मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त

हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत के आवेदन पर सुनवाई करते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि वह 30 दिन के भीतर कुल मुआवजा राशि का 50 प्रतिशत जमा करे। कोर्ट के आदेश के अनुसार, निर्धारित राशि जमा करने के बाद ही मुआवजे की शेष राशि की वसूली पर रोक लागू होगी। इसका मतलब है कि कंपनी को अंतरिम राहत का लाभ लेने के लिए पहले मुआवजे की आधी राशि जमा करनी होगी। इसके साथ ही 38 हजार रुपये के खर्च और मुआवजे की आधी राशि जमा करने से संबंधित रसीद अगली सुनवाई में पेश करनी होगी।

High Court News: दावेदार शर्तों के साथ निकाल सकेंगे राशि

कोर्ट ने दावेदारों को जमा की गई राशि निकालने की अनुमति भी दी है। हालांकि, इसके लिए उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि यदि आगे चलकर हाई कोर्ट के निर्देश पर राशि लौटाने की जरूरत पड़ती है, तो वे उसे वापस करेंगे। मामले में बस चालक सहित अन्य पक्षकारों को दोबारा नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अब हाई कोर्ट में अपील पर आगे सुनवाई होगी। फिलहाल कोर्ट ने देरी माफ कर अपील स्वीकार की है, लेकिन मुआवजे की आधी राशि जमा करने और 38 हजार रुपये का खर्च देने की शर्त रखी है।

Updated on:
12 Oct 2026 04:26 pm
Published on:
12 Oct 2026 04:26 pm