60 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस आशा पारेख (Asha Parekh) ने अपने दौर की कई हिट फिल्मों में काम किया है. आशा पारेख की फिल्मी दुनिया जितनी चमकदार थी असल दुनिया में वो मोहब्बत होते हुए भी अकेली थीं और सारी जिंदगी उनका अकेला ही रहना पड़ा.
60 से लेकर 70 दशक तक इंडस्ट्री पर अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाकारी के लिए अपनी पहचान बना चुकीं मशहूर एक्ट्रेस आशा पारेख (Asha Parekh) को कौन नहीं जानता. उन्होंने अपने दौर की कई हिट फिल्मों में बड़े स्टार्स के साथ काम किया है. आशा पारेख की जोड़ी स्टार्स के साथ पसंद की जाती थी और उनकी भी अपनी एक लव स्टोरी थी, जो कभी मुकमल नहीं हो पाई. आशा पारेख जिंदगी भर के लिए अकेले ही रह गईं. आशा पारेख बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट कुछ फिल्मों में काम कर चुकी थीं.
वहीं उन्होंने अपने करियर की शुरूआत साल 1959 में आई फिल्म 'दिल देके देखो' से की थी. इस फिल्म में उनके साथ उस दौर के बड़े एक्टर शम्मी कपूर नजर आए थे. फिल्म को काफी पसंद किया गया था. इस फिल्म के डायरेक्टर नासिर हुसैन (Director Nasir Hussain) थे. हालांकि शुरुआत में नासिर और आशा के बीच कुछ जमती नहीं थी, लेकिन फिल्म की शूटिंग पूरी होते-होते दोनों अच्छे दोस्त बन गए और धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. इसके बाद नासिर हुसैन की हर फिल्म में आशा पारेख ही हीरोइन नजर आने लगी.
आशा पारेख नें 'तीसरी मंज़िल','बहारों के सपने', 'प्यार का मौसम', 'फिर वही दिल लाया हूं' जैसी कई फिल्मों में काम किया है, जिनको नासिर हुसैन ने ही डायरेक्ट किया था, लेकिन दोनों कभी शादी के बंधन में बंध नहीं सके और इसके पीछे का कारण ये था कि नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा थे, लेकिन बड़ी बात ये है कि आशा पारेख इस बात को अच्छी तरह जानती थी, फिर भी वो नासिर से बेहद मोहब्बत करती थीं. दूसरी तरफ वो नासिर का घर भी नहीं तोड़ना चाहती थीं.
आशा के दोस्तों और परिवार वालों ने उन्हें बहुत समझाया कि इस रिश्ते को खत्म कर दें, लेकिन आशा दिल के हाथों मजबूर थीं. उन्होंने किसी की नहीं सुनी और अपनी पूरी जिंदगी नासिर हुसैन की मोहब्बत और याद में गुज़ार दी. बता दें कि नासिर हुसैन बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान (Aamir Khan) के चाचा थे. उन्होंने आमिर के साथ दो फिल्मों में काम और वो दोनों ही फिल्में आमिर के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुईं. वो फिल्में थीं 'कय़ामत से कय़ामत तक' और 'जो जीता वही सिकंदर'.