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“आप दवा लें, रोज़ा मैं रखूंगा”, जब बीमार मीना कुमारी के लिए गुलजार ने कायम की दोस्ती की मिसाल

Gulzar Meena Kumari Friendship: मीना कुमारी के गुलजार बेहद अच्छे दोस्त थी। उनकी दोस्ती आज भी सालों बाद याद की जाती है। उन्होंने अपनी बीमार दोस्त के लिए रमजान में रोज़ा रखने की कसम खाई थी। यही नहीं, निधन से पहले मीना जी ने अपनी सबसे अनमोल शायरी और डायरी भी गुलजार को सौंप दी थी। जानिए दोनों के इस अनमोल रिश्ते की पूरी कहानी…
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Aug 01, 2026
Meena Kumari and Gulzar Friendship
गुलजार ने रखा था मीना कुमारी के लिए रोजा (Photo Source- @FilmHistroryPic)

Meena Kumari and Gulzar Friendship: हिंदी सिनेमा में 'ट्रेजेडी क्वीन' के नाम से मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी और दिग्गज गीतकार-निर्देशक गुलजार की दोस्ती बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत और पावन कहानियों में से एक मानी जाती है। साल 1965 में फिल्म 'बेनजीर' के सेट पर पहली मुलाकात से शुरू हुआ यह रिश्ता समय के साथ इतना गहरा होता गया कि मीना कुमारी के आखिरी दिनों में गुलजार न केवल उनके सबसे बड़े हमदर्द बने, बल्कि उनकी रूहानी यादों के रखवाले भी बन गए थे। उन्होंने अपनी दोस्ती में वो कर दिखाया जो काफी कम होता है। गुलजार ने अपनी दोस्त मीना कुमारी के लिए रमजान में रोजा रखा था।

बीमार मीना कुमारी के लिए गुलजार ने रखे रोज़े

साल 1971 में गुलजार ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म 'मेरे अपने' बनाई। इस फिल्म में आनंदी देवी के किरदार के लिए उन्होंने मीना कुमारी को चुना था। उस दौरान मीना कुमारी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और बेहद कमजोर हो चुकी थीं। इसके बावजूद, अपने काम के लिए उनका समर्पण अद्भुत था। वह आंखें बंद करके गुलजार से सीन सुना करती थीं और उसे महसूस करती थीं।

गंभीर बीमारी के कारण रमजान के पाक महीने में मीना कुमारी के लिए दवाइयां छोड़ना और रोज़ा रखना असंभव हो गया था। लेकिन मीना जी रोज़ा रखने पर अड़ी थीं। तब गुलज़ार ने उनसे एक ऐसा वादा किया जिसने दोस्ती की नई मिसाल कायम की। गुलजार ने उनसे कहा, "आप अपनी दवाइयां लीजिए और आपकी जगह रोज़ा मैं रखूंगा। हम इसका 'सवाब' आपस में आधा-आधा बांट लेंगे।" वहीं, मीना कुमारी के निधन के बाद भी कई सालों तक गुलज़ार ने इस वादे को निभाया और उनके नाम पर रमज़ान में रोजे रखते रहे।

मीना कुमारी की सबसे कीमती वसीयत

31 मार्च 1972 को 'मेरे अपने' के रिलीज होने के कुछ ही महीनों बाद मीना कुमारी का निधन हो गया था। दुनिया को अलविदा कहने से पहले मीना जी ने अपनी सबसे अनमोल संपत्ति- अपनी शायरी, कविताएं और पर्सनल डायरी गुलजार की देखरेख में छोड़कर गई थीं।

मीना कुमारी 'नाज' तखल्लुस से बेहद खूबसूरत शायरी लिखती थीं। गुलजार का मानना था कि मीना जी को आजाद नज़्म (मुक्त छंद) लिखना पसंद था। लोग अक्सर सोचते थे कि मीना कुमारी की निजी डायरी में उनके निजी जीवन के सनसनीखेज राज छिपे होंगे, लेकिन गुलजार ने इस धारणा को खारिज करते हुए बताया कि उसमें कोई विवाद नहीं, बल्कि मीना जी के विचारों की अद्भुत गहराई और काव्यात्मक सुंदरता है। गुलजार आज भी उनकी उस डायरी को एक अनमोल धरोहर की तरह संभालकर रखे हुए हैं।

Updated on:
01 Aug 2026 12:52 pm
Published on:
01 Aug 2026 12:43 pm