
प्रेम कीटाणु (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Prem Keetanu Movie Review: वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ युवाओं की जिंदगी, रिश्तों, दोस्ती और प्यार के बीच चलने वाली उलझनों को पर्दे पर लाने की कोशिश करती है। फिल्म का केंद्र विशाल और सुहानी हैं, जिनकी मुलाकात बेहद अजीब परिस्थितियों में होती है और धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ते की शुरुआत होती है। कहानी में रोमांस के साथ करियर को लेकर असमंजस और एक तीसरे शख्स की मौजूदगी भी है, जो रिश्तों को और पेचीदा बना देती है।
कहानी विशाल की है, जिसकी जिंदगी फिलहाल किसी तय मुकाम पर नहीं पहुंची है। वो अपने भविष्य को लेकर परेशान है और आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने की योजना बना रहा है। इसके लिए उसे पैसों का इंतजाम करना है। इसी दौरान उसकी मुलाकात सुहानी से होती है।
दोनों की पहली मुलाकात किसी रोमांटिक फिल्म जैसी नहीं, बल्कि एक मजेदार गलतफहमी से होती है। इसके बाद दोनों के बीच तकरार होती है और गुस्से में वे एक-दूसरे को कुछ ऐसा कह देते हैं, जो बाद में कहानी का मजेदार हिस्सा बन जाता है। कुछ समय गुजरने के बाद दोनों एक शादी समारोह में दोबारा आमने-सामने आते हैं।
इस बार विशाल के मन में सुहानी को लेकर भावनाएं पैदा होने लगती हैं। लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है। सुहानी की जिंदगी में रंजीत भी मौजूद है। वह उसके साथ काम करता है, अच्छी नौकरी में है और विशाल की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित नजर आता है। यही अंतर दोनों पुरुष किरदारों के बीच एक तरह का मुकाबला खड़ा करता है।
सुहानी खुद भी अपने भविष्य के साथी को लेकर काफी स्पष्ट है। उसने अपने मन में एक तरह की सूची बना रखी है कि उसके जीवनसाथी में कौन-कौन सी खूबियां होनी चाहिए। ऐसे में विशाल के सामने सिर्फ प्यार का सवाल नहीं, बल्कि खुद को साबित करने की चुनौती भी है। उसका दोस्त मगन इस पूरे सफर में उसका साथ देता है। इसके आगे क्या होता है, इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
विशाल के किरदार में वीर पहाड़िया को फिल्म में प्यार, असुरक्षा, महत्वाकांक्षा और निराशा जैसे कई भाव दिखाने का मौका मिलता है। हालांकि, अभिनय में वो कुछ खास कमाल दिखाते हुए नजर नहीं आते। वीर कई जगह पर फिल्म की कमजोर कड़ी लगते हैं, वहीं अपारशक्ति खुराना अपने किरदार में काफी अच्छे से ढल जाते हैं। रंजीत के किरदार में उनका अंदाज और डायलॉग डिलीवरी प्रभावित है।
आफिया सैयद के लिए ये फिल्म खास है, क्योंकि वो हिंदी सिनेमा में अपना डेब्यू कर रही हैं। सुहानी के तौर पर उन्होंने काफी इंप्रेस किया है और पहली फिल्म के हिसाब से उन्हें पूरे नंबर दिए जाने चाहिए। वहीं निखिल विजय भी मगन के रूप में हास्य वाले हिस्सों में ध्यान खींचते हैं। राकेश बेदी अपने अनुभव के दम पर सुहानी के पिता की भूमिका को संभालते दिखाई देते हैं। फिल्म की जान राकेश बेदी हैं, जो अपने अनुभव से फिल्म में जान फूंकते हुए नजर आ रहे हैं।
फिल्म का निर्देशन अपूर्व सिंह कार्की ने किया है। ‘प्रेम कीटाणु’ 2024 की मलयालम फिल्म ‘प्रेमालु’ का हिंदी रूपांतरण है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती मूल कहानी की मासूमियत और सहज हास्य को नए दर्शकों तक पहुंचाने की थी।
कहानी में विशाल और सुहानी के रिश्ते, रंजीत की एंट्री और विशाल की निजी परेशानियों से कई संभावनाएं पैदा होती हैं। मगर इन पहलुओं को उतनी गहराई नहीं मिल पाती, जितनी एक रोमांटिक कॉमेडी से उम्मीद की जाती है। फिल्म में कई गाने भी हैं, जो कहानी के अलग-अलग पड़ावों के साथ जोड़े गए हैं।
‘प्रेम कीटाणु’ पहली मोहब्बत, दोस्ती और युवा उम्र की असमंजस भरी भावनाओं को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाने की कोशिश करती है। हालांकि फिल्म अपना असर नहीं छोड़ पाती है। जहां फिल्म का रोमांस पर्दे पर पसंद किया गया, वहीं अभिनय, लेखन ने निराश किया है।
कुल मिलाकर, फिल्म की कहानी में प्यार का ट्रायंगल, दोस्ती, करियर की चिंता और दिल टूटने के बाद खुद को संभालने की कोशिश जैसे कई पहलू हैं। हालांकि अगर आपको अपना समय खराब करना है तो आप ये फिल्म देख सकते हैं क्योंकि ये सिर्फ एक ही बार देखने लायक फिल्म है।
Updated on:
02 Oct 2026 01:45 pm
Published on:
02 Oct 2026 01:34 pm
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