Pooja Bedi: पूजा बेदी ने प्रतिमा बेदी के साथ अपने आजादी से भरे बचपन के बारे में खुलकर बात की और बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए इसके उलट और सख्त तरीका क्यों चुना।
Pooja Bedi: बॉलीवुड एक्टर कबीर बेदी और लेजेंड्री क्लास्सिकल डांसर-मॉडल प्रतिमा बेदी की बेटी पूजा बेदी का पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जो आम परिवारों से बिल्कुल अलग था। पूजा कहती हैं कि उनका पालन-पोषण एक ऐसे माहौल में हुआ जिसे वो "आजाद ख्यालों वाला" (Ultra-Bohemian) बताती हैं। उनके माता-पिता ने कभी भी उन पर पुराने रीति-रिवाजों या ज्यादा बंदिशें नहीं थोपीं।
जोस अलुक्कास के यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई एक बातचीत में, पूजा ने अपने अलग तरीके से हुए पालन-पोषण, अपनी मां की सोच और खुद सख्त मां बनने की वजहों के बारे में बात की।
ये भी पढ़ें
अपने बचपन को याद करते हुए, पूजा ने कहा कि उनका पालन-पोषण करियर एक्सपेक्टेशंस के बजाय आजादी के माहौल में बीता। उन्होंने कहा, 'मैं एक आजाद ख्यालों वाले परिवार में पली-बढ़ी। मुझे लगता है कि मेरे माता-पिता ने मुझे लगता है कि मेरे माता-पिता ने भारत में खुली सोच और बिंदास लाइफस्टाइल वाले दौर की शुरुआत की थी, जिसमें सेक्स, ड्रग्स और रॉक एंड रोल का असर था।”
इसके आगे उन्होंने कहा, “हमारा रास्ता कभी भी काम से जुड़े सपनों से तय नहीं हुआ। हमारा रास्ता हमेशा खुशी से तय हुआ और हमेशा इस बात से तय हुआ कि हमें क्या खुशी देता है। मेरी मां कहती थीं, 'बेटी, मैंने तुम्हें इस दुनिया में इसलिए लाया है क्योंकि मैं मां बनना चाहती थी। अपने स्वार्थ के कारण ही सही, तुम यहां हो। मैं तुम्हारी आभारी हूं। मैं तुम्हें घर, सिर पर छत, अच्छा खाना देने के लिए जिम्मेदार हूं ताकि तुम्हारा पेट भरा रहे। मैं तुम्हें अच्छी शिक्षा देने के लिए ऋणी हूं ताकि तुम खुद को सशक्त बना सको। मैं तुम्हें अनुभव देने के लिए जिम्मेदार हूं ताकि तुम जान सको कि क्या चुनना है और हमेशा तुम्हारे पास वो अनुभव रहें। अगर तुम्हें आराम और अच्छी जिंदगी चाहिए, तो उसके लिए मेहनत करो। तुम चाहे घूमने-फिरने वाली जिंदगी जीना चाहो, बिंदास बनना चाहो, इंजीनियर या अंतरिक्ष यात्री बनना चाहो, जिंदगी में जो भी बनना है, उसका फैसला खुद करो। तुम्हारी बुनियादी ज़रूरतें तो पूरी हो चुकी हैं क्योंकि मैंने तुम्हें यहां भेजा है।”
इसके आगे उन्होंने बताया, “तुम्हारी पसंद तुम्हें जिस रास्ते पर ले जाए, और जिंदगी में जो भी हासिल करना चाहो, उसके लिए आगे बढ़ो और अपना रास्ता खोजो।”
दिलचस्प बात यह है कि पूजा ने बताया कि ये सच है कि वो अपनी मां से मिली स्वतंत्रता को बहुत अहमियत देती हैं, लेकिन उनका अपने बच्चों की परवरिश का तरीका उनकी मां से बहुत अलग है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत सख्त मां हूं। मुझे लगता है कि हर कुछ पीढ़ियों बाद फिर से वैसी ही सख्त मां लौट आती है।”
पूजा के अनुसार, बच्चे अक्सर या तो अपनी परवरिश के खिलाफ आवाज उठाते हैं या उससे सबक सीखते हैं। उनके मामले में, वो कहती हैं कि उन्होंने बचपन में मिली जरुरत से ज्यादा स्वतंत्रता के खिलाफ अब रिएक्शन दिया है।
“मुझे लगता है कि मेरे बचपन में मुझे मिली इतनी ज्यादा आजादी को मैंने पसंद नहीं किया क्योंकि मुझे याद है जब मैं बच्ची थी तो मैं अपनी मां के पास गई और मैंने कहा, ‘मां, आप जानती हैं कि आप एक बहुत बुरी मां हैं। आप मुझे कभी नहीं बतातीं कि मुझे क्या पहनना है’।” पूजा बेदी ने याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी मां से अपने बचपन में कपड़ों के चुनाव से लेकर कर्फ्यू के समय तक, कई पहलुओं पर सवाल किये थे। इसके आगे उन्होंने बताया, "मैंने अपनी मां से कहा था, मैं छोटी स्कर्ट पहनती हूं। आप मुझे लंबे कपड़े पहनने के लिए नहीं कहतीं। मैं बाहर जाती हूं और मैं यह नहीं सोचती कि मैं किसके साथ जा रही हूं। आप मुझसे कभी ये नहीं पूछतीं कि मैं कितने बजे वापस आउंगी। मेरे लिए समय की कोई पाबन्दी नहीं है और आप मुझे ये भी नहीं बतातीं कि मुझे क्या खाना है।”
बता दें कि पूजा बेदी की मां प्रतिमा बेदी पाबंदियां लगाने के बजाय, अपनी बेटी के फैसले पर पूरी तरह भरोसा करती थीं। इस बारे में बात करते हुए पूजा ने कहा कि उसकी मां का जवाब उनको जीवन भर याद रहा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, ‘तुम चाहती हो कि मैं तुमसे ये सब पूछूं? तुम पाबंदियां चाहती हो?’ उन्होंने कहा, ‘क्या तुम इतनी समझदार नहीं हो कि ये सब बातें खुद तय कर सको?’ क्या तुमको नहीं लगता कि मैं ये कहना चाहूंगी कि मैंने तुमको इतनी समझदारी के साथ पाला-पोसा है कि तुम खुद समझ सकती हो कि क्या सही है, क्या गलत है, कहां तक सीमा तय करनी है, कितना पीना है, किसके साथ बाहर जाना है, किसके साथ नहीं जाना है, और किस समय घर लौटना चाहिए। ये बहुत ही समझदारी भरे डिसीजन हैं, इसलिए मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है।"
“मेरी मां ने मुझे सिखाया कि माता-पिता होने का मतलब है अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि हम बिना किसी पर निर्भर हुए अपनी लाइफ जी सकें। उनकी मुझसे कोई अपेक्षा नहीं थी और वो चाहती थीं कि मैं पूरी तरह से आत्मनिर्भर और आजाद ख्यालों वाली बनूं। उनका पूरा ध्यान इसी बात पर रहता था कि 'कल अगर मैं न भी रहूं, तो मेरे बच्चे भटक न जाएं'। वो चाहती थीं कि हम मजबूत, आत्मनिर्भर और अपनी शर्तों पर जीने के लिए सशक्त हों।”
बता दें कि साल 1998 में पूजा बेदी की मां प्रतिमा बेदी का कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा के दौरान भूस्खलन में निधन हो गया था।