Rajpal Yadav In Tihar Jail: राजपाल यादव इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं। एक्टर को पुलिस के सामने सरेंडर करना पड़ा, जिसके चलते अब वो तिहाड़ जेल में हैं। इस मुश्किल में फंसने के पीछे की वजह एक फिल्म से जुड़ी है, जिसे खुद राजपाल ने डायरेक्ट किया था। चलिए इस फिल्म के बारे में बताते हैं।
Rajpal Yadav Movie: फिल्म इंडस्ट्री में इस समय राजपाल यादव को लेकर हंगामा मचा हुआ है। अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले राजपाल यादव आज अपनी जिंदगी के उस मोड़ पर खड़े हैं, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। जिस कलाकार ने पूरी दुनिया को हंसाया, आज वही एक्टर कानूनी उलझनों और वित्तीय संकट के बोझ तले दबा हुआ तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे है।
राजपाल यादव आखिर किस वजह से जेल में हैं। ऐसा क्या हुआ जो उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। ये सब शुरू हुआ था उनकी एक फिल्म की वजह से जो उनके करियर का सबसे बुरा सपना साबित हुई। फिल्म 'अता पता लापता'। साल 2012 में आई इस फिल्म को राजपाल ने सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि अपने एक बड़े अरमान की तरह देखा था। उन्होंने न केवल इसमें मुख्य भूमिका निभाई, बल्कि खुद डायरेक्टर की कमान भी संभाली थी। फिल्म का बजट करीब 5 करोड़ रुपये था, जो उस समय एक बड़ी रकम मानी जाती थी। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर इसके नतीजे बेहद डरावने थे। फिल्म ने पूरी दुनिया में महज 38 लाख रुपये का कारोबार किया।
'अता पता लापता है', फिल्म के प्लॉट की बात करें तो इसमे माधव चतुर्वेदी पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं कि उनके पूरे घर में बड़ी चोरी हो गई है। शुरुआती तौर पर मामला एक सामान्य चोरी का लगता है, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। पुलिस को शक होने लगता है कि कहीं यह चोरी इंश्योरेंस की मोटी रकम हासिल करने के लिए खुद रची गई साजिश तो नहीं है।
इसी बीच मीडिया की एंट्री मामले को और भी पेचीदा और सनसनीखेज बना देती है। खबरों के चलते जनता का दबाव बढ़ता है और पुलिस पर सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी और भारी हो जाती है।, लेकिन ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर डब्बा गोल साबित हुई थी। एक कॉमेडी और पॉलिटिकल सटायर ये फिल्म यूट्यूब पर उपबल्ध हैं और इसे IMBD की 5.4 रेटिंग मिली थी। जो आप फ्री में देख सकते हैं।
इसी फिल्म की भारी नाकामी ने राजपाल यादव को कर्ज के जाल में फंसा दिया। फिल्म बनाने के लिए उन्होंने जो लोन लिया था, उसकी अदायगी न हो पाने के कारण मामला चेक बाउंस और कोर्ट-कचहरी तक जा पहुंचा। लगभग एक दशक से अधिक चले इस कानूनी विवाद में आखिरकार अदालत ने सख्त रुख अपनाया और राजपाल को सरेंडर करने का आदेश दे डाला। जेल जाते समय राजपाल यादव का गला रुंध गया था और उनकी आंखें नम थीं, जो उनकी बेबसी को साफ बयां कर रही थीं।
राजपाल के करीबी दोस्त और मशहूर निर्देशक अनीस बज्मी इस घटना से काफी दुखी हैं। उन्होंने बताया कि राजपाल यादव एक बेहद ईमानदार और वफादार इंसान हैं। अनीस कहते हैं, "कई बार कलाकार अपने काम को लेकर इतने जुनूनी हो जाते हैं कि वे कागजी बारीकियां और समझौतों के पेच नहीं समझ पाते। राजपाल की मंशा कभी किसी को धोखा देने की नहीं थी, बस एक महत्वाकांक्षी फैसला और सही अनुभव की कमी उन पर भारी पड़ गई।"