
Rekha forced kissing scene Do Shikari: बॉलीवुड की गलियों से अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती रहती हैं जो सोचने पर मजबूर कर देती हैं। एक ऐसी ही इनसाइड स्टोरी है, जिसने सोशल मीडिया पर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है। हम बात कर रहे हैं साल 1969 की फिल्म 'अंजना सफर' जो बाद में 'दो शिकारी' के नाम से रिलीज हुई की। जिसके एक विवादित किसिंग सीन ने उस दौर में तहलका मचा दिया था। सुपरस्टार रेखा और अभिनेता बिस्वजीत के बीच हुए इस 5 मिनट लंबे जबरन किसिंग सीन पर अब कई नए और हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं।
हाल ही में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार ने इस पूरी घटना का एक ऐसा सच उजागर किया है, जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। ज्योति वेंकटेश ने बताया, "यह उस समय की बात है जब रेखा नई-नई चेन्नई से मुंबई आई थीं। मैंने सुना था कि फिल्म के डायरेक्टर राजा नवाथे ने जानबूझकर पब्लिसिटी और विवाद खड़ा करने के लिए एक घटिया योजना बनाई थी। शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले, डायरेक्टर ने बिस्वजीत के कान में जाकर फुसफुसाया। 'इस लड़की को लिप-टू-लिप किस करना।' जब बिस्वजीत ने हिचकिचाते हुए पूछा कि क्या वह गाल पर किस कर सकते हैं, तो डायरेक्टर ने साफ मना कर दिया और कहा कि यह सीन की डिमांड है, तुम्हें होठों पर ही किस करना होगा।"
इस पूरे प्लान की भनक रेखा को बिल्कुल भी नहीं थी। जैसे ही डायरेक्टर ने 'एक्शन' बोला, बिस्वजीत ने रेखा को पकड़ा और लगातार 5 मिनट तक कैमरे के सामने किस करते रहे। बिना सहमति के हुए इस बर्ताव से रेखा इतनी सदमे में आ गईं थीं कि वह सेट पर ही फूट-फूट कर रोने लगीं। इस खौफनाक अनुभव के बाद उस दिन की शूटिंग तो कैंसिल कर दी गई, लेकिन मेकर्स ने उस शॉट को फिल्म में वैसे ही इस्तेमाल किया।
अब बिस्वजीत की बेटी और एक्ट्रेस पल्लवी चटर्जी ने इस मामले पर अपने पिता का बचाव करने के बजाय रेखा का साथ दिया है। पल्लवी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलकर माना कि जो हुआ वह "बिल्कुल गलत" था। उन्होंने कहा, "रेखा उस समय महज एक टीनेजर थीं और इस तरह के सीन के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। मेरे पिता को या तो उस सीन को करने से मना कर देना चाहिए था या फिर पहले रेखा की सहमति लेनी चाहिए थी।"
पल्लवी ने यह भी बताया कि उस दौर में दोनों परिवारों के बीच बहुत अच्छे रिश्ते थे और रेखा अक्सर उनके घर आती-जाती थीं। ऐसे में एक भरोसेमंद पारिवारिक दोस्त द्वारा किया गया यह व्यवहार रेखा के लिए और भी ज्यादा दर्दनाक और धोखे जैसा था। बिस्वजीत भले ही सालों तक यह कहते रहे कि वह सिर्फ डायरेक्टर के आदेश का पालन कर रहे थे, लेकिन उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था।