
Shekhar Suman Emotional On Son Death: एक मां-बाप के लिए संतान को खोने का दर्द शायद कभी खत्म नहीं होता। अभिनेता शेखर सुमन भी आज 31 साल बाद अपने बड़े बेटे आयुष सुमन की याद में भावुक हो जाते हैं। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में बेटे की बीमारी, उसकी मौत और उससे जुड़े उन अनुभवों को साझा किया, जिन्हें वो आज भी एक आध्यात्मिक संकेत मानते हैं। शेखर का कहना है कि कई ज्योतिषियों और पुजारियों ने भविष्यवाणी की है कि आयुष एक दिन परिवार में दोबारा जन्म लेगा और उन्हें पूरा विश्वास है कि वो अध्ययन सुमन के बेटे के रूप में लौटेगा।
शेखर सुमन के बड़े बेटे आयुष को बचपन में ही एक दुर्लभ दिल की बीमारी 'एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस' हो गई थी। ये बीमारी इतनी दुर्लभ थी कि डॉक्टरों के मुताबिक अरबों में किसी एक व्यक्ति को होती है। शेखर ने बताया कि सबसे पहले उनके पिता, जो खुद डॉक्टर थे, उन्होंने आयुष के शरीर में असामान्य बदलाव महसूस किए थे और जांच कराने की सलाह दी थी।
मुंबई में हुए टेस्ट के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। डॉक्टरों ने बताया कि आयुष एक ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जिसका कोई इलाज नहीं है। साल 1995 में महज 11 साल की उम्र में आयुष ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इस हादसे ने शेखर और उनके परिवार को अंदर तक तोड़ दिया।
शेखर सुमन का कहना है कि समय गुजर गया, लेकिन बेटे की यादें कभी धुंधली नहीं हुईं। परिवार आज भी रोज उसकी तस्वीरें देखता है और उसके बारे में बातें करता है। उन्होंने दावा किया कि कई बार उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे आयुष उनके आसपास ही मौजूद है।
उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जब उनकी पत्नी अल्का सुमन काशी विश्वनाथ मंदिर गई थीं। वहां एक व्यक्ति ने उनसे पैसे मांगते हुए ठीक उसी अंदाज और आवाज में बात कही, जो आयुष बचपन में कहा करता था। इस घटना ने अल्का को अंदर तक झकझोर दिया। जब उन्होंने उस व्यक्ति को तलाशने की कोशिश की तो वह कहीं दिखाई नहीं दिया।
शेखर सुमन ने बताया कि कई पुजारियों और ज्योतिषियों ने उन्हें कहा है कि आयुष किसी न किसी रूप में परिवार में वापस आएगा। अभिनेता के मुताबिक, उन्हें बताया गया है कि उनका बेटा अध्ययन सुमन के बेटे के रूप में दोबारा जन्म ले सकता है। शेखर ने कहा कि उन्हें आज भी आयुष की आवाज सुनाई देती है और उसकी मौजूदगी महसूस होती है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि शरीर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन रिश्ते और आत्माएं कभी खत्म नहीं होतीं। इसी उम्मीद के सहारे वो और उनका परिवार आज भी जी रहा है।