Suman Kalyanpur Death: मनोरंजन जगत में उस समय मातम छा गया जब खबर आई कि सिंगर सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम निधन हो गया है। 1960 से 70 के दशक में लता मंगेशकर से जिनकी तुलना होती थी। आइये जानते हैं उनके कौन से हैं सहाबहार गाने और कैसे हुआ उनका निधन…
Suman Kalyanpur passing away: जहां पूरा देश IPL 2026 का जश्न मना रहा था वहीं, इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर आई। जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। अनगिनत सदाबहार और रोमांटिक गानों को अपनी जादुई आवाज देने वाली सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया। उन्होंने 89 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। आज की पीढ़ी भले ही इस नाम से थोड़ी कम वाकिफ हो, लेकिन 1960 और 70 के दशक में जब हिंदी सिनेमा पर स्वर कोकिला लता मंगेशकर का राज हुआ करता था, उस दौर में सुमन कल्याणपुर ने अपनी सुरीली आवाज के दम पर संगीत जगत में एक खास पहचान बनाई थी। सुमन कल्याणपुर आखिर कौन थी, उन्होंने वो कौन से बॉलीवुड को गाने दिए जो हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गए, आइये जानते हैं...
सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार शाम मुंबई के लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर हुआ। जिसने इंडस्ट्री को गहरा दुख दिया है। सुमन कल्याण एक प्लेबैक सिंगर थीं, जिन्होंने 'तुमने पुकारा और हम चले आए', 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से' और 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' जैसे सदाबहार गाने गाए थे। अब उनके निधन के बाद से इंडस्ट्री में शोक की लहर है। सुमन कल्याण पिछले कुछ समय से बढ़ती उम्र और उससे जुड़ी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। गायिका के जीवन पर प्रशंसित मराठी जीवनी 'सुमन सुगंध' लिखने वाली उनकी करीबी दोस्त मंगला खाडिलकर ने उनके आखिरी पलों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा, "सुमन जी का निधन रविवार रात करीब 8 बजे उनके घर पर बुढ़ापे के कारण हुआ। उनके आखिरी पल बेहद शांतिपूर्ण रहे। सबसे खूबसूरत बात यह थी कि पिछले कुछ दिनों से वह घर पर लगातार अपने ही पुराने गाने सुन रही थीं और संगीत के बीच ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।"
1960 और 1970 के दशक के बीच सुमन जी की आवाज की बनावट काफी हद तक लता मंगेशकर से मिलती-जुलती थी, जिसके कारण अक्सर लोग और संगीत समीक्षक दोनों की तुलना करते थे। हालांकि, सुमन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को खारिज किया और इसे महज एक इत्तेफाक बताया। साल 2022 के एक इंटरव्यू में उन्होंने लता जी को याद करते हुए कहा था, "हर कोई उनके गानों को पसंद करता था और वह हमेशा अमर रहेंगी। हम दोनों ने फिल्म 'चांद' के लिए एक साथ एक डुएट भी रिकॉर्ड किया था। जब भी मैं उनसे मिलती थी, तो मुझे ऐसा लगता था जैसे मैं अपनी किसी बेहद करीबी सहेली से मिल रही हूं।"
सुमन जी ने सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि मराठी, बंगाली, असमिया, कन्नड़ और उड़िया सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों यादगार गीत गाए। फिल्मों के अलावा उन्होंने भक्ति गीत, गज़लें और शास्त्रीय ठुमरियां भी गाईं। उनके जाने से संगीत इंडस्ट्री में शोक की लहर है। सोमवार को पवन हंस श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके परिवार में अब उनकी बेटी चारू हैं।