
Who is Jatayu in Ramayana: निदेशक नितेश तिवारी की मच अवेटेड फिल्म 'रामायण' (Ramayana) इन दिनों सिनेमाघरों में छाई हुई है। फिल्म के VFX, भव्य सेट और मुख्य कलाकारों के अभिनय के साथ-साथ एक ऐसे किरदार ने दर्शकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, जिसने थिएटर से बाहर आते ही हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। वह किरदार कोई और नहीं बल्कि जन्मों-जन्मों से याद रखे गए दिव्य पक्षी जटायु (Jatayu) का है। फिल्म में अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने अपनी जादुई और भारी-भरकम आवाज से जटायु के इस किरदार को अमर कर दिया है। रावण के खिलाफ अकेले खड़े होने वाले इस बूढ़े पक्षी का त्याग और बलिदान आज भी हर किसी को झकझोर कर रख देता है, लेकिन जटायु कौन था, उसने रावण का सामना क्यों किया और रामायण में उसके आखिरी काम में इतनी खास बात क्या है?
पौराणिक महाकाव्य 'रामायण' के पारंपरिक विवरण के अनुसार, जटायु को पक्षियों का राजा और दिव्य गिद्ध माना गया है। वह सूर्य देव के सारथी 'अरुण' के पुत्र और 'संपाती' के छोटे भाई तथा महाबली 'गरुड़' के भतीजे थे। कथा के अनुसार, जटायु भगवान राम के पिता राजा दशरथ के बहुत खास मित्र भी थे। यही पारिवारिक और पुराना प्यार उस समय सामने आता है जब राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान अरण्य में निवास कर रहे होते हैं।
जब लंका के शक्तिशाली राजा रावण द्वारा माता सीता का अपहरण किया जाता है और वह उन्हें पुष्पक विमान में लेकर आसमान से गुजरते हैं, तब घायल करने वाली इस चीख को बूढ़े जटायु सुन लेते हैं। इतने बूढ़ें होने की बाद भी जटायु एक पल के लिए भी नहीं हिचकिचाते और माता सीता को बचाने के लिए सीधे रावण के उड़ते हुए रथ पर हमला बोल देते हैं।
सीता हरण के समय जटायु और रावण के बीच एक असाधारण मुकाबला देखने को मिलता है। एक तरफ जहां सर्वशक्तिशाली रावण अपनी तलवार के वार से जटायु के पंख काट देता है और उन्हें बुरी तरह घायल कर जमीन पर गिरा देता है, वहीं दूसरी तरफ जटायु का अपनी जान की परवाह किए बिना लड़ना उनका साहस इतिहास में अमर हो गया। वह सीता जी को बचाने में भले ही पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने रावण के रथ को भारी नुकसान पहुंचाया।
जब भगवान राम और लक्ष्मण सीता मां को ढूंढते हुए गंभीर घायल जटायु के पास पहुंचते हैं, तो वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहे होते हैं। मरने से पहले जटायु राम को पूरी घटना बताते हैं और रावण की दिशा का सुराग देते हैं। इस दृश्य ने सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों को अंदर तक झकझोर दिया है। भगवान राम एक अपने की तरह जटायु के लिए शोक मनाते हैं और अपने हाथों से उनका अंतिम संस्कार करते हैं। यह प्रसंग किसी भी प्रजाति में नेकी, वफादारी और धर्म की रक्षा के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में सामने आया है।
बता दें, फिल्म रामायण में जटायु और रावण की लड़ाई भी लोगों को बेहद पसंद आई है। लेकिन स्क्रीन पर एक्शन सीन (VFX और निर्माण) को तैयार करने में नितेश तिवारी को करीब साढ़े 6 साल का लंबा समय लगा है। इस सीन के दौरान रावण के उड़ने वाले पुष्पक विमान के फाइनल लुक को तय करने में ही करीब 2 साल का समय लगा और इसके लिए 40 से 50 अलग-अलग डिजाइन तैयार किए गए थे। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लोग शामिल थे और सिर्फ एक एक्शन सीक्वेंस को सही ढंग से तैयार करने के लिए कितनी ज्यादा मेहनत करनी पड़ी।
जटायु का मरना और रावण संग लड़ाई को फिल्म रामायण का अहम हिस्सा माना जा रहा है। जो लोगों को बेहद अच्छा लग रहा है और लोग उसकी जमकर तारीफ भी कर रहे हैं।