
Unique Devotee Of Bageshwar Baba: यदि मनुष्य ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है। आस्था और विश्वास के बल पर लोग ऐसे कार्य कर जाते हैं, जो सामान्य व्यक्ति के लिए कल्पना से परे होते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण जोधपुर जिले के निवासी 23 वर्षीय भवानी शंकर दाधीच पेश कर रहे हैं। उन्होंने बागेश्वर धाम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति के चलते करीब 900 किलोमीटर की दंडवत यात्रा का संकल्प लिया है। इस यात्रा की खास बात यह है कि उन्होंने अन्न का त्याग कर रखा है और केवल फलाहार के सहारे प्रतिदिन लगभग 3 किलोमीटर दंडवत यात्रा कर रहे हैं।
भवानी शंकर दाधीच ने बताया कि वर्ष 2025 में उन्होंने जोधपुर स्थित माताजी का अंगना से बागेश्वर धाम के लिए पैदल यात्रा की थी। यह यात्रा उन्होंने करीब दो माह में पूरी की। पैदल यात्रा के दौरान और उसके बाद उनके मन में बागेश्वर धाम के प्रति गहरी आस्था और विश्वास जागृत हुआ। इसी भावना के चलते उन्होंने 25 दिसंबर 2025 को दंडवत यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।
दंडवत यात्रा में उनके पिता ओम दाधीच भी हर कदम पर उनके साथ चल रहे हैं। भवानी शंकर जहां दंडवत करते हुए आगे बढ़ते हैं वहीं उनके पिता पैदल चलते हुए तीन पहियों वाले रथनुमा वाहन को साथ लेकर चलते हैं। इस वाहन में कपड़े, आवश्यक सामग्री और अन्य सामान रखा जाता है। पिता-पुत्र की यह जोड़ी श्रद्धा और समर्पण की मिसाल बन गई है।
भवानी शंकर प्रतिदिन लगभग 3 किलोमीटर दंडवत यात्रा करते हैं। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु उनके भोजन और रात्रि विश्राम की व्यवस्था कर देते हैं। वर्तमान में उन्होंने अन्न ग्रहण करना पूरी तरह छोड़ रखा है और केवल फलाहार के सहारे ही यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि बागेश्वर बालाजी धाम पहुंचने के बाद भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही वे अन्न ग्रहण करेंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच माह में वह लगभग 400 किलोमीटर से अधिक की दंडवत यात्रा पूरी कर चुके हैं और बूंदी जिले में प्रवेश कर चुके हैं। उनका लक्ष्य करीब 900 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर बागेश्वर धाम पहुंचना है। भवानी शंकर ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष पैदल यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने 41 दिनों तक निराहार रहकर साधना की थी। इसी दौरान उनके मन में दंडवत यात्रा का संकल्प पैदा हुआ। तब से वह लगातार अपनी आस्था और विश्वास के बल पर इस कठिन यात्रा को पूरा करने में जुटे हुए हैं। उनकी ये यात्रा क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और दृढ़ संकल्प का अनूठा उदाहरण बन गई है।