
Bhimlat Dam : बूंदी-चित्तौड़ मार्ग स्थित बाणगंगा नदी पर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बने जिले के 68 साल पुराने भीमलत बांध में रिसाव की समस्या बढ़ने से इसके टूटने की आशंका उत्पन्न हो गई है। हालांकि, बांध की स्थिति और बांध सुरक्षा दल की रिपोर्ट के आधार पर जल संसाधन विभाग सतर्क हो गया है और बांध को टूटने से बचाने के लिए पूरा भरने से पहले ही जल निकासी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, 1958 में बने इस बांध की आर्च आकार की पक्की दीवार में कई जगह रिसाव की समस्या बढ़ गई है, जिसके चलते विभाग ने बांध और नीचे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट पर कुछ माह पहले राज्य बांध सुरक्षा संगठन के एक दल ने भीमलत बांध का जायजा लिया था और इसकी दीवार की स्थिति को देखते हुए इसे असुरक्षित माना था। संगठन ने जल संसाधन विभाग को बांध की मरम्मत कराने का सुझाव भी दिया था। टीम ने बांध में इस साल 20 फीट से ज्यादा पानी का भराव नहीं करने के भी निर्देश दिए थे।
बांध की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने विस्तृत कार्य रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग को भेज दिए हैं, जहां से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा। गौरतलब है कि बांध की कुल भराव क्षमता 36 फीट है और इस समय बांध में करीब 24 फीट पानी आ गया है। बांध से विगत तीन दिनों से कम वेग से जल निकासी की जा रही थी, जिसे मानसून की गतिविधियां फिर शुरू होने के चलते मंगलवार से बढ़ा दिया है। बांध को खाली करने से इस साल किसानों को रबी की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
1958 में मेवाड़ व हाड़ौती की सीमा पर 4 लाख 58 हजार रुपए में बनकर तैयार हुए भीमलत बांध की सुरक्षा दीवार की मरम्मत के लिए विभाग ने करीब 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है और इसके प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजे है। विभागीय जानकारी के अनुसार इस साल अक्टूबर माह तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होकर मरम्मत का काम शुरू होने की संभावना है।
ऊपरमाल के पठार व हाड़ौती के मैदानी इलाकों के संगम स्थल भीमलत जलप्रपात से ऊपर बने भीमलत बांध में नहरी प्रणाली नहीं है। यहां से पानी छोड़ा जाता है जो भीमलत जलप्रपात के रास्ते तीन किलोमीटर नाले में बहते हुए नीचे बने अभयपुरा बांध में पहुंचता है जहां से दो नहरें निकलती है। इस बांध परियोजना से बूंदी पंचायत समिति के नीम का खेड़ा, मेघारावत की झोपड़ियां, मंगाल, गुढ़ानाथावतान, शाहपुरा व रामनगर पंचायत के दो दर्जन गांवों की करीब 3402 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई होती है। इस साल बांध से जल निकासी के कारण किसानों को रबी की फसलों के लिए सिंचाई की चिंता सताने लगी है।
जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता प्रेमचंद मीणा ने बताया कि भीमलत बांध की दीवार में रिसाव की समस्या और राज्य बांध सुरक्षा संगठन के निर्देशानुसार नीचे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस साल बांध को पूरा नहीं भरा जाएगा। केंद्रीय जल आयोग को प्रस्ताव भिजवा दिया है और स्वीकृति मिलते ही बांध की मरम्मत शुरू कराने के प्रयास कर रहे हैं।