बूंदी

Bundi : हर बारिश में जिदंगी को खतरा, जर्जर भवनों पर कार्रवाई नहीं

मानसून पूर्व की बारिश ने दस्तक दे दी है, लेकिन शहर में कई जर्जर भवन व इमारतें हादसे को न्योता दे रही हैं। नगरपरिषद और प्रशासन की लापरवाही के कारण हर साल कागजों पर नोटिस देकर इतिश्री कर ली जाती है। न तो इन भवनों का ध्वस्त किया जाता है और ना ही मरम्मत। पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं।

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Jun 20, 2026
dilapidated building
बूंदी. चौगान गेट के निकट जर्जर होती इमारत।

बूंदी. मानसून पूर्व की बारिश ने दस्तक दे दी है, लेकिन शहर में कई जर्जर भवन व इमारतें हादसे को न्योता दे रही हैं। नगरपरिषद और प्रशासन की लापरवाही के कारण हर साल कागजों पर नोटिस देकर इतिश्री कर ली जाती है। न तो इन भवनों का ध्वस्त किया जाता है और ना ही मरम्मत। पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। इस बार बारिश ने जरा जोर पकड़ा तो कोई बड़ा हादसा होना तय है।

शहर में करीब दो दर्जन से अधिक भवन जर्जर स्थिति में हैं, जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में खड़े हैं। हर मानसून से पहले परिषद रस्म अदायगी के तौर पर मकान मालिकों को नोटिस थमा देती है कि वे खुद ही इन्हें गिरा लें या मरम्मत करा लें। नोटिस देने के बाद फाइल बंद कर दी जाती है, न कोई फॉलोअप होता है और न ही कार्रवाई।

सुध लेने वाला कोई नहीं

देखने वाली बात यह है कि पिछले 5 साल हर बार ऐसा ही होता आया है। सर्वे होता है, लिस्ट बनती है, प्रशासन अलर्ट होता है। अधिकारी बयान देते हैं कि ‘जल्द कार्रवाई होगी’। फिर मानसून निकल जाता है। न एक भवन गिरा, बस पैसा और स्टाफ की कमी का रोना रोकर जिम्मेदारी टाल दी जाती है। नतीजा, वहीं जर्जर दीवारें, वही टूटी छतें अगली बारिश का इंतजार करती हैं। यह जरूर है हादसे के बाद प्रशासनिक अमला पहुंच जाता है, मदद के लिए आश्वासन देकर अपना काम पूरा कर लेता है।

कब तक नोटिस

प्रदेश के कई जिलों में इमारतें गिरने के हादसे हो चुके है। सवाल सीधा है-जब मकान मालिक पैसा खर्च नहीं कर रहा तो सरकार को खुद पहल कर ध्वस्तीकरण क्यों नहीं कराना चाहिए? लोगो का कहना है कि जिम्मेदारों के एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर दस्तखत करने से छतें मजबूत नहीं होंगी।

यहां है जर्जर भवन की स्थिति

शहर के सदर बाजार, चौगान दरवाजे के भीतर, कहार मोहल्ला, तिलक चौक, ऊपराला बाजार, बालचंद पाड़ा सहित पुरानी बूंदी के ऐसे कई इलाके है, जहां जर्जर भवन के साथ ऐसी इमारतें है जो जर्जर अवस्था में है।

केस-1
16 सितंबर 2025 को रात में अचानक बूंदी कहार मोहल्ले में रमेश कहार, दुर्गाशंकर कहार का मकान गिर गया था, जिसमें परिवार वाले बाल बाल बचे थे, अचानक पूरे मकान की छत ही नीचे आ गई थी। राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा ने पीडि़त परिवार के साथ अनशन के बाद प्रशासन की ओर से कार्यवाही की गयी थी और मुआवजा स्वीकृत हुआ था।

केस-2
7 सितंबर 2024 को अतिवृष्टि से गणेश बाग के सामने प्रताप नगर में मोहनलाल बैरागी का मकान गिर गया था। उस समय मकान से सब लोग बाहर थे, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान का सारा सामान मलबे में दब गया और कई दिनों तक पीडि़त परिवार को खाने पीने तक के लिए मोहल्लेवासियों की मदद का मोहताज होना पड़ा। कई महीने तक सरकारी मुआवजा भी फाइलों में अटक गया। जब पीडि़त परिवार ने कलक्ट्रेट तक न्याय यात्रा निकाली जब जाकरकार्रवाई हुई।

मानसून को देखते हुए शहर में कितने जर्जर भवन ओर इमारत है इसके लिए संबंधित अधिकारियों सूची मांगी गई है। डेटा आने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बृजेश रॉय, आयुक्त, नगरपरिषद, बूंदी

Published on:
20 Jun 2026 11:48 am