
Ramgarh Vishdhari Tiger Reserve: गुढ़ानाथावतान (बूंदी): रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे तीन गांवों के किसानों को अब टाइगर रिजर्व से बाहर स्टेट हाइवे-29 पर खटकड़ कस्बे के पास बसाया जाएगा। स्वैच्छिक विस्थापन प्रक्रिया के तहत वन विभाग और जिला प्रशासन ने इसके लिए प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। जल्द ही किसानों को जमीन के बदले जमीन आवंटित की जाएगी।
इस संबंध में बूंदी जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित वन अधिकार समिति की 24 सितंबर को हुई बैठक में खटकड़ के निकट केसरपुरा वनखंड की 244.9723 हेक्टेयर वन भूमि को राजस्व भूमि में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर मुहर लगाई गई। प्रस्ताव केंद्रीय समिति के अनुमोदन के लिए भेजे जा रहे हैं। स्वीकृति मिलते ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर-1 में बसे भैरूपुरा गांव के विस्थापन की प्रक्रिया भी चल रही है। गांव के 208 परिवारों में से अब तक 146 परिवारों को नकद राशि की पहली और 16 परिवारों को दूसरी किश्त मिल चुकी है। पहली किश्त के रूप में तीन लाख और दूसरी किश्त के रूप में साढ़े सात लाख रुपए खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। शेष साढ़े चार लाख रुपए की एफडी करवाई जाएगी। बजट के अभाव में शेष परिवारों को राशि नहीं मिल पाई है। भीमगंज और बाड़ा धूंधला गांवों को भी टाइगर रिजर्व से विस्थापित करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। दोनों गांवों के ग्रामीणों के विकल्प फॉर्म भरना शुरू कर दिया गया है।
टाइगर रिजर्व के गुलखेड़ी गांव को सबसे पहले विस्थापित किया जा रहा है। यहां से 162 परिवार पूरी तरह गांव छोड़ चुके हैं। अभी 51 परिवार गांव में रह रहे हैं, जिन्हें भूमि पैकेज का इंतजार है। केसरपुरा के पास भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने से इन परिवारों के विस्थापन का रास्ता भी साफ होगा। गुलखेड़ी में दो परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने विस्थापन का विकल्प नहीं भरा और गांव में ही रहना चाहते हैं।
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर-1 में आठ गांवों में करीब दो हजार परिवार निवास कर रहे हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से जंगल से बाहर बसाने की योजना है। इनमें जैतपुर रेंज का भीमगंज और रामगढ़ रेंज के केशवपुरा, भैरूपुरा, गुढ़ा मकदू, जावरा, जावरा की झोपड़ियां, गुलखेड़ी और बाड़ा घूंधला शामिल हैं। आठ गांवों में से अभी तक केवल गुलखेड़ी को ही आंशिक रूप से विस्थापित किया जा सका है।
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे आठ गांवों का विस्थापन स्वैच्छिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। ग्रामीणों को नकद या भूमि पैकेज में से विकल्प चुनने की आजादी है। नकद पैकेज में प्रति परिवार तीन किश्तों में 15 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है, जिसमें साढ़े चार लाख रुपए की एफडी शामिल है।
भूमि पैकेज में खाते की जमीन के अतिरिक्त जमीन की सिंचित या असिंचित किस्म के आधार पर करीब एक से डेढ़ हेक्टेयर जमीन और 3 लाख 70 हजार रुपए देने का प्रावधान है। जो काश्तकार वर्तमान में गांव में निवास नहीं करते, लेकिन विस्थापित होने वाले गांव में उनके नाम जमीन है, उन्हें नगरीय सीमा से दूरी के अनुसार डीएलसी दर से अधिक राशि का भुगतान किया जाएगा।
टाइगर रिजर्व के तीन गांवों को भूमि पैकेज में दूसरी जगह भूमि आवंटन के लिए केसरपुरा वनखंड के डायवर्जन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही इन्हें भूमि आवंटित कर विस्थापित करने का प्रयास है।
-हरि सिंह हाड़ा, सहायक वन संरक्षक, रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व (कोर), बूंदी