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क्रूड ऑयल में जबरदस्त उछाल, 125 डॉलर के पार पहुंचा भाव, क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी तेजी?

Petrol Diesel Price Today: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और ईरान द्वारा हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने से वैश्विक तेल बाजार में भारी तेजी आई है। भारत के MCX बाजार में तेल की कीमत 10,410 रुपये प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका है।
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Apr 30, 2026
Petrol Diesel Price Hike
पेट्रोल की कीमत में भारी इजाफा हो सकता है। (PC: AI)

Crude Oil Prices: इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव और अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का खत्म न होना है। स्थिति यह है कि सप्लाई रुकने की आशंका से निवेशक डरे हुए हैं और बाजार में उथल-पुथल मची है।

आसमान छू रहे हैं तेल के दाम

ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) जून वायदा 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। पिछले नौ दिनों से इसमें लगातार बढ़त देखी जा रही है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 107 डॉलर प्रति बैरलके ऊपर ट्रेड कर रहा है।

भारतीय बाजार (MCX) की बात करें तो यहां भी हालात गंभीर हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल 3 फीसदी के भारी उछाल के साथ 10,410 रुपये प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। यह आम आदमी की जेब पर बड़ा असर डाल सकता है क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने से आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।

क्या स्थिर रहेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में जारी तूफानी तेजी के कारण ऑयल कंपनिया पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर का घाटा खाकर तेल बेच रही हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोगों में चर्चा है कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी। इसी के चलते पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतार देखने को मिल रही है। वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया।

क्यों आ रही है इतनी तेजी?

तेल की इन बढ़ती कीमतों के पीछे तीन बड़े कारण हैं-

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी ने समुद्री शिपिंग को काफी हद तक रोक दिया है। दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है। अब अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों की घेराबंदी की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है।
  • अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बातचीत के रास्ते बंद होने से बाजार को लग रहा है कि तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहेगी।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से तेल उत्पादक देशों के संगठन 'ओपेक' (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला किया है। इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है कि भविष्य में तेल उत्पादन की नीतियां क्या होंगी।
Published on:
30 Apr 2026 12:10 pm